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Success Story: 35 लाख की नौकरी ठुकराकर चुनी सिविल सेवा, जानिए… IPS अर्चित चंदक की कहानी

Success Story: 'जहां चाह है, वहां राह है', यह कहावत आईपीएस अर्चित चंदक की जीवन यात्रा पर बिल्कुल सटीक बैठती है। अर्चित ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में कुछ कर दिखाने की ठान ली जाए और उसे पाने के लिए कठिन परिश्रम किया जाए, तो सफलता जरूर कदम चूमती है।

Success Story
सफलता की कहानी
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PRIYA DWIVEDI
4 मिनट

Success Story: 'जहां चाह है, वहां राह है', यह कहावत आईपीएस अर्चित चंदक की जीवन यात्रा पर बिल्कुल सटीक बैठती है। अर्चित ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में कुछ कर दिखाने की ठान ली जाए और उसे पाने के लिए कठिन परिश्रम किया जाए, तो सफलता जरूर कदम चूमती है। देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को पहले ही प्रयास में पास करके अर्चित ने न सिर्फ अपने सपनों को पंख दिए, बल्कि लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन गए।


महाराष्ट्र के नागपुर में जन्मे और पले-बढ़े अर्चित बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे। साल 2012 में उन्होंने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) में नागपुर शहर में टॉप किया और यहीं से उनके शैक्षणिक सफर की बुलंद उड़ान शुरू हुई। जेईई मेन और एडवांस्ड में सफलता प्राप्त करने के बाद अर्चित ने देश के प्रतिष्ठित आईआईटी दिल्ली में प्रवेश लिया और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की।


आईआईटी के दौरान ही उन्हें एहसास हुआ कि उनकी असली मंजिल कॉरपोरेट की चकाचौंध नहीं, बल्कि देश सेवा है। इसी सोच के साथ उन्होंने एक जापानी कंपनी द्वारा दिए गए 35 लाख रुपये सालाना के हाई प्रोफाइल पैकेज को ठुकरा दिया। यह निर्णय किसी भी युवा के लिए आसान नहीं होता, लेकिन अर्चित ने सिविल सेवा के जरिए समाज में बदलाव लाने की ठान ली थी।


बी.टेक के बाद उन्होंने पूरी लगन और समर्पण के साथ UPSC की तैयारी शुरू की और साल 2018 में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 184 हासिल कर ली। इसके साथ ही उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में हुआ और उन्होंने महाराष्ट्र कैडर प्राप्त किया।


उनकी पहली पोस्टिंग भुसावल के बाजारपेठ थाने में थाना प्रभारी (SHO) के रूप में हुई, जहां उन्होंने अपने ईमानदार और संवेदनशील कार्यशैली से जनता का विश्वास जीता। जनता और अधीनस्थों के साथ उनके व्यवहार ने उन्हें एक जनप्रिय अधिकारी बना दिया। यहां से उनकी प्रशासनिक यात्रा और तेज हो गई, और आगे चलकर वे नागपुर के पुलिस उपायुक्त (DCP) बने।


मई 2025 से अर्चित चंदक महाराष्ट्र के अकोला जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अपने हर कार्यक्षेत्र में उन्होंने ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और संवेदनशील नेतृत्व का परिचय दिया है। सिर्फ प्रशासनिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि फिटनेस और खेलों के प्रति भी उनका समर्पण उल्लेखनीय है। उन्होंने 42 किलोमीटर की मुंबई मैराथन पूरी की है, जो उनकी शारीरिक और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्हें शतरंज का गहरा शौक है और उनकी FIDE रेटिंग 1820 है, जो उनकी रणनीतिक सोच और खेल के प्रति जुनून को दर्शाती है।


अर्चित चंदक की कहानी न सिर्फ यूपीएससी aspirants के लिए, बल्कि हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों के लिए संघर्ष करने को तैयार है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सपनों को साकार करने के लिए आत्मविश्वास, समर्पण और मेहनत सबसे जरूरी हथियार हैं।

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