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पेट्रोल-डीजल की छुट्टी कर देगा नया E85 फ्यूल? सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी, जानिए कितना सस्ता और कितना दमदार है यह ईंधन

E85 Fuel India: भारत में पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में E85 फ्यूल को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। सरकार इसे पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम मान रही है। हालांकि इसके इस्तेमाल और उपलब्धता को लेकर अभी कई सीमाएं...

पेट्रोल-डीजल की छुट्टी कर देगा नया E85 फ्यूल? सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी, जानिए कितना सस्ता और कितना दमदार है यह ईंधन
Ramakant kumar
5 मिनट

E85 Fuel India: भारत में अब पेट्रोल और डीजल के विकल्प के तौर पर एक नए ईंधन E85 फ्यूल की एंट्री हो चुकी है.विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के मौके पर इसकी शुरुआत की गई है और इसे देश के परिवहन क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में E85 फ्यूल न सिर्फ प्रदूषण कम करेगा बल्कि विदेशी तेल पर भारत की निर्भरता भी घटाने में अहम भूमिका निभाएगा.यही वजह है कि इस समय E85 फ्यूल देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है.


फिलहाल E85 फ्यूल देश के 48 चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराया गया है.सरकार ने इसके विस्तार का भी रोडमैप तैयार कर लिया है.योजना के मुताबिक दिसंबर 2026 तक इसे 500 पेट्रोल पंपों और दिसंबर 2027 तक 5000 आउटलेट्स तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.यदि यह योजना सफल होती है तो आने वाले समय में लाखों वाहन चालक इस नए ईंधन का इस्तेमाल कर सकेंगे.


आखिर क्या है E85 फ्यूल?

E85 एक हाई एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल है.इसमें करीब 80 से 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 से 20 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है.सामान्य पेट्रोल की तुलना में इसमें एथेनॉल की मात्रा कई गुना अधिक होती है.यही कारण है कि इसे पर्यावरण के लिए अधिक सुरक्षित और स्वच्छ ईंधन माना जाता है.


एथेनॉल एक बायोफ्यूल है जिसे गन्ना, मक्का, टूटे चावल और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है.चूंकि यह प्राकृतिक और नवीकरणीय संसाधनों से बनता है, इसलिए इसे ग्रीन फ्यूल की श्रेणी में रखा जाता है.विशेषज्ञों के अनुसार E85 के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.


कैसे चलती हैं E85 पर गाड़ियां?

E85 फ्यूल का इस्तेमाल सामान्य वाहनों में नहीं किया जा सकता.इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी से लैस विशेष वाहनों की जरूरत होती है.इन गाड़ियों में ऐसे सेंसर और एडवांस इंजन मैनेजमेंट सिस्टम लगे होते हैं जो टैंक में मौजूद ईंधन के मिश्रण को पहचान लेते हैं.


इसके बाद वाहन का सिस्टम अपने आप इंजन की सेटिंग बदल देता है.ड्राइवर को अलग से कोई बटन दबाने या बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ती.यानी वाहन खुद तय करता है कि उसे पेट्रोल पर चलना है या एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर.


क्यों E85 पर इतना जोर दे रही है सरकार?

भारत हर साल अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किए गए कच्चे तेल से पूरा करता है.इस पर अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा खर्च होती है.यदि E85 जैसे एथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल बढ़ता है तो आयातित तेल पर निर्भरता कम हो सकती है.


सरकार का मानना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी.साथ ही ऊर्जा सुरक्षा भी बढ़ेगी क्योंकि ईंधन का बड़ा हिस्सा देश के भीतर ही तैयार किया जा सकेगा.


किसानों को भी होगा बड़ा फायदा

E85 फ्यूल का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद है.एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी.इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है. जानकारों का कहना है कि यदि एथेनॉल उद्योग का विस्तार होता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.इसके जरिए गांवों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिल सकती है.


क्या सच में पेट्रोल-डीजल को दे सकता है टक्कर?

E85 को भविष्य का ईंधन जरूर माना जा रहा है, लेकिन फिलहाल यह पेट्रोल और डीजल को पूरी तरह चुनौती देने की स्थिति में नहीं है.इसके पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ी चुनौती माइलेज की है.एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है.इस वजह से E85 पर चलने वाले वाहनों का माइलेज कुछ कम हो सकता है.हालांकि इसकी कीमत और पर्यावरणीय लाभ इस कमी की भरपाई कर सकते हैं.


दूसरी बड़ी चुनौती इसकी उपलब्धता है.अभी देश के बहुत कम पेट्रोल पंपों पर E85 उपलब्ध है.जब तक इसका नेटवर्क पूरे देश में नहीं फैलता, तब तक आम लोगों के लिए इसे अपनाना आसान नहीं होगा. इसके अलावा फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या भी अभी बेहद सीमित है.जब तक ऑटोमोबाइल कंपनियां बड़ी संख्या में ऐसे वाहन बाजार में नहीं लातीं, तब तक E85 का व्यापक उपयोग संभव नहीं है.