BEGUSARAI: धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बिहार में जश्न का माहौल है। बिहार बंद के दौरान जैसे ही छात्रों को पता चला कि धर्मेन्द्र प्रधान ने छात्रों के दबाव में आकर इस्तीफा दे दिया है, तो खुशी की लहर दौर पड़ी। छात्र एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर और मिठाइया खिलाकर होली और आतिशबाजी कर दिवाली मनायी। इस दौरान छात्रों की खुशी देखते ही बन रही थी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बेगूसराय में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विजय उत्सव मनाया। हड़ताली चौक पर आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-कार्यकर्ता जुटे और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर, मिठाई खिलाकर तथा आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया। पूरे आयोजन के दौरान छात्र आंदोलन के समर्थन में नारे गूंजते रहे और कार्यकर्ताओं ने इसे छात्र-युवा संघर्ष की ऐतिहासिक जीत बताया।
विजय उत्सव के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए AISF के राष्ट्रीय सचिव अमीन हमजा ने कहा, "जब-जब देश के छात्र-नौजवानों ने करवट बदली है, तब-तब सत्ता की नींव हिली है। मोदी सरकार का झुकना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का ताजा उदाहरण है।" उन्होंने कहा कि यह किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि पूरे देश के छात्र-युवा आंदोलन की जीत है। उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी छात्र-नौजवानों को बधाई देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संघर्ष और एकजुटता ने सरकार को निर्णय बदलने पर मजबूर कर दिया।
अमीन हमजा ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली, पटना सहित देशभर में चले आंदोलन के दौरान कई जगह छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, मुकदमे दर्ज किए गए और कई छात्रों की मौत भी हुई। उन्होंने कहा कि तमाम दमन के बावजूद छात्र अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटे और आखिरकार आंदोलन ने अपना परिणाम दिया। उन्होंने सरकार से मांग की कि आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए तथा छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं।
सभा को संबोधित करते हुए AISF के जिलाध्यक्ष अमरेश कुमार एवं राष्ट्रीय परिषद सदस्य कैसर रेहान ने कहा कि सरकार ने छात्र-नौजवानों की ताकत को कम आंकने की भूल की थी। आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि लाठीचार्ज, दमन और दबाव के बल पर छात्र आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जितना आंदोलन को कुचलने की कोशिश होगी, उतनी ही मजबूती से छात्र अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
नेताओं ने कहा कि छात्रों की लोकतांत्रिक मांगों को दबाने के बजाय सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। साथ ही छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई गई। इस अवसर पर बिपीन कुमार, अंकित सिंह, माया, श्याम कुमार, शाहरूख इकबाल, सोनू कुमार, सन्नी कुमार, जगन्नाथ सहित बड़ी संख्या में छात्र-कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





