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Bihar CM : नीतीश के कहने पर सम्राट चौधरी बने CM? मुख्यमंत्री ने खुद बताया अंदर का राज

क्या नीतीश कुमार की सलाह पर भाजपा ने सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया? CM सम्राट चौधरी ने खुद इस सवाल का जवाब दिया और नीतीश से अपने रिश्ते पर भी खुलकर बात की।

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Tejpratap
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7 मिनट

Bihar News : बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर एक सवाल लंबे समय से चर्चा में रहा है—क्या सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने के पीछे नीतीश कुमार की भी भूमिका थी? आखिर भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री चुनते हुए सम्राट चौधरी पर ही भरोसा क्यों जताया? क्या एनडीए के सबसे पुराने चेहरों में शामिल नीतीश कुमार की पसंद ने इस फैसले को प्रभावित किया?


मुख्यमंत्री बनने के करीब पौने पांच महीने बाद सम्राट चौधरी ने इन सवालों पर खुलकर बात की है। एक पॉडकास्ट में उन्होंने साफ किया कि भाजपा का मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला नीतीश कुमार नहीं, बल्कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व करता है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार के साथ अपने रिश्ते को बेहद खास बताते हुए उन्हें पिता तुल्य और अभिभावक बताया।


नीतीश के कहने पर सीएम बनने की बात से इनकार

सम्राट चौधरी से जब पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार के कहने या उनकी सहमति के चलते भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, तो उन्होंने इस संभावना को खारिज कर दिया।


उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार एनडीए के सम्मानित नेता हैं और उनके संबंध एनडीए से हैं, लेकिन भाजपा का नेता कौन होगा या भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए किसे चुना जाएगा, यह पार्टी का आंतरिक फैसला है।


यानी सम्राट चौधरी के मुताबिक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने ही किया।


यह जवाब इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद बिहार की राजनीति में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया। इसके बाद सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बने और राज्य को भाजपा का पहला मुख्यमंत्री मिला।


फिर नीतीश कुमार से सम्राट के रिश्ते कैसे हैं?

मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार के साथ अपने संबंधों को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह करीब 30 वर्षों से नीतीश कुमार को जानते हैं और इस दौरान दोनों के रिश्ते में कई उतार-चढ़ाव आए।


कभी राजनीतिक मतभेद रहे तो कभी साथ काम करने का मौका मिला। लेकिन 2024 में जब भाजपा नेतृत्व ने जेडीयू के साथ गठबंधन में आगे बढ़ने का फैसला किया और बिहार के विकास के लिए मिलकर काम करने की रणनीति बनी, तब उन्होंने नीतीश कुमार के साथ मजबूती से खड़े होने का फैसला किया।


सम्राट ने यह भी स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार के साथ उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं रही। राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग समय पर बदलती रही हैं, लेकिन व्यक्तिगत रिश्ते अपनी जगह कायम रहे।


नीतीश को बताया पिता तुल्य

सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के लिए इस्तेमाल किए गए अपने शब्दों से भी काफी कुछ साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का उनके ऊपर विशेष आशीर्वाद रहा है और आज भी है।


उन्होंने नीतीश कुमार को पिता समान और अभिभावक बताया। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या वह नीतीश कुमार को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं, तो सम्राट चौधरी ने इस पर अलग जवाब दिया।


उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पिता तुल्य जरूर हैं, लेकिन उनके गुरु उनके अपने पिता शकुनी चौधरी रहे हैं।


इस बयान ने दोनों नेताओं के बीच रिश्ते की एक अलग तस्वीर सामने रखी। राजनीतिक तौर पर भले ही दोनों अलग-अलग दलों में रहे हों और कई मौकों पर मतभेद भी हुए हों, लेकिन सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के प्रति सम्मान की बात स्पष्ट रूप से कही।


सम्राट बोले- कभी नहीं सोचा था मुख्यमंत्री बनूंगा

मुख्यमंत्री बनने को लेकर सम्राट चौधरी ने एक और दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे।


उनके मुताबिक भाजपा ने उन्हें राजनीतिक जीवन में लगातार कई जिम्मेदारियां दीं। वह विधायक बने, विधान परिषद के सदस्य रहे, मंत्री बने और फिर उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके अलावा उन्हें भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष और विधान परिषद में नेता की भूमिका भी मिली।


इन तमाम जिम्मेदारियों के बाद मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना उनके लिए खुद भी अप्रत्याशित था।


सम्राट चौधरी के बयान से यह संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनकी नियुक्ति को वह अपने राजनीतिक सफर का स्वाभाविक लक्ष्य नहीं मानते थे, बल्कि इसे पार्टी नेतृत्व के फैसले के रूप में देखते हैं।


भाजपा ने क्यों चुना सम्राट चौधरी?

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि भाजपा ने आखिर उन्हीं को क्यों चुना।


बिहार में भाजपा लंबे समय से एनडीए की महत्वपूर्ण सहयोगी रही है, लेकिन राज्य की सत्ता में मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास नहीं था। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद पहली बार भाजपा के सामने अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने का मौका आया।


ऐसे में सम्राट चौधरी का नाम सामने आना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था। वह संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहे और सरकार में मंत्री तथा उपमुख्यमंत्री के तौर पर भी काम कर चुके थे।


हालांकि उनके चयन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक कयास लगाए जाते रहे, लेकिन अब खुद मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फैसला नहीं किया था।


'अंदर की बात' पर CM का साफ संदेश

सम्राट चौधरी के पूरे बयान का सबसे अहम संदेश यही है कि भाजपा के मुख्यमंत्री का फैसला भाजपा का शीर्ष नेतृत्व करता है। नीतीश कुमार एनडीए के सम्मानित नेता हैं और उनका आशीर्वाद उन्हें मिला है, लेकिन मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय पार्टी के अंदर हुआ।


इस बयान से बिहार की सत्ता के मौजूदा समीकरण को समझने में एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर मिलता है। एक तरफ सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के प्रति सम्मान और व्यक्तिगत रिश्ते की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ वह यह भी साफ कर देते हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने वाला फैसला भाजपा नेतृत्व का था।


अब बिहार की राजनीति में इस बयान के बाद एक सवाल फिर चर्चा में है—क्या सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार के रिश्ते भविष्य की राजनीति में भी इसी तरह 'पिता तुल्य' बने रहेंगे, या बदलते सियासी समीकरण दोनों नेताओं के रिश्तों की दिशा तय करेंगे?