Bihar News : पटना-गया रेलखंड पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए बुधवार का दिन राहत भरी खबर लेकर आया है। पिछले चार दिनों से पुनपुन नदी के बढ़े जलस्तर के कारण प्रभावित ट्रेनों का परिचालन अब धीरे-धीरे सामान्य होने जा रहा है। नदी का जलस्तर स्थिर होने के बाद रेलवे ने पुनपुन-परसा बाजार रेलखंड के बीच पुल संख्या-21 की डाउन लाइन पर परिचालन बहाल करने का निर्णय लिया है।
हालांकि, रेलवे इस बार किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए डाउन लाइन पर ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार फिलहाल 10 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। यानी बुधवार से ट्रेनें चलेंगी जरूर, लेकिन पुल पार करते समय उनकी रफ्तार काफी धीमी रहेगी।
चार दिन में 36 ट्रेनें रहीं प्रभावित
दरअसल, 4 सितंबर से पुनपुन नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण रेलवे ने सुरक्षा की दृष्टि से डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया था। इसका सीधा असर पटना और गया के बीच रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों पर पड़ा।
डाउन लाइन बंद होने के कारण कई मेमू ट्रेनों को रद करना पड़ा, जबकि लंबी दूरी की कुछ ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया। चार दिनों में कुल 36 ट्रेनें रद रहीं। अचानक ट्रेनों के रद और डायवर्ट होने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। नौकरी, कारोबार, पढ़ाई और इलाज के लिए पटना-गया के बीच आने-जाने वाले लोगों की दिनचर्या तक प्रभावित हो गई।
बुधवार से किन यात्रियों को मिलेगी राहत?
अब बुधवार से परिचालन बहाल होने के बाद यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर दैनिक यात्रियों के लिए मेमू ट्रेनों की वापसी महत्वपूर्ण है। रेलवे की ओर से जिन ट्रेनों को बुधवार से बहाल करने की जानकारी दी गई है, उनमें 63242 गया-पटना, 63244 गया-पटना, 63245 पटना-गया, 63247 पटना-गया, 63248 गया-पटना, 63251 पटना-गया, 63256 गया-पटना, 63274 पटना-आरजीडी, 63250 गया-पटना और 63253 पटना-गया मेमू शामिल हैं।
इन ट्रेनों के फिर से चलने से पटना और गया के बीच रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को काफी राहत मिल सकती है।
पुल और नदी पर रहेगी रेलवे की नजर
परिचालन शुरू होने के बावजूद रेलवे पूरी तरह सतर्क रहेगा। अधिकारी और इंजीनियर पुल के आसपास नदी के जलस्तर, पुल की स्थिति और ट्रैक की सुरक्षा पर लगातार निगरानी रखेंगे। मंगलवार शाम से ही इंजीनियरों ने डाउन लाइन पर परिचालन बहाल करने की तैयारियां शुरू कर दी थीं।
रेलवे के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पुनपुन नदी के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी न हो। अगर नदी का जलस्तर फिर बढ़ता है या पुल की सुरक्षा को लेकर कोई खतरा सामने आता है, तो परिचालन व्यवस्था में तत्काल बदलाव किया जा सकता है।
10 किमी की रफ्तार क्यों?
बुधवार से ट्रेनें भले ही चलने लगें, लेकिन 10 किमी प्रति घंटा की गति सीमा यात्रियों को यह संकेत देती है कि रेलवे अभी पूरी तरह जोखिम खत्म मानकर नहीं चल रहा है। जलस्तर स्थिर रहने और पुल व ट्रैक की स्थिति सामान्य पाए जाने के बाद ही आगे गति सीमा बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा।
फिलहाल बुधवार की सुबह से पटना-गया रेलखंड पर ट्रेन की सीटी फिर सुनाई देने लगेगी। चार दिनों की रुकावट के बाद पटरी पर लौटती ट्रेनें यात्रियों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आ रही हैं। हालांकि, सफर पर निकलने से पहले यात्रियों के लिए अपनी ट्रेन का ताजा रनिंग स्टेटस और समय जरूर जांच लेना बेहतर होगा।





