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दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक पर विधानसभा में जोरदार हंगामा, विपक्ष ने सरकार को घेरा, कहा..गरीबों की आह मत लीजिए, वरना तबाह हो जाएंगे

बिहार विधानसभा में भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। राजद विधायक राहुल कुमार और एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल इमान ने 200 रुपये शुल्क का विरोध करते हुए सरकार पर गरीबों पर अतिरिक्त बोझ डालने का आरोप लगाया।

बिहार न्यूज
सरकार पर साधा निशाना
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: बिहार विधानसभा में बिहार भूमि दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और एआईएमआईएम के विधायकों ने प्रस्तावित शुल्क वृद्धि पर सवाल उठाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाये।


राजद विधायक राहुल कुमार ने सदन में कहा कि सरकार का खजाना खाली हो चुका है, इसलिए अब दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पर 200 रुपये शुल्क वसूलने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार जनता पर लगातार आर्थिक बोझ डाल रही है।


राहुल कुमार ने तंज कसते हुए कहा, "हम तो कहते हैं कि विधायकों से लेकर आम लोगों तक का चमड़ा उधेड़ लीजिए और उसी का जूता बनवा लीजिए।"


वहीं, एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल इमान ने भी विधेयक का विरोध करते हुए सरकार से गरीबों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि गरीबों की आह मत लीजिए, वरना तबाह हो जाएंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि शुल्क बढ़ाना ही है तो 200 रुपये के बजाय 50 रुपये रखा जाए, ताकि आम लोगों पर कम बोझ पड़े।


विधेयक को लेकर विपक्ष ने सरकार से प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार करने की मांग की, जबकि सदन में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।


वही राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने कहा कि विपक्ष को यह फोबिया हो गया है कि खजाना खाली हो गया है। यह बीमारी काफी खतरनाक है,इसका इलाज हम बता देते हैं। सरकार के द्वारा जो विकास के काम किए जा रहे हैं, ऐसा देखे थे क्या? दिलीप जायसवाल के इस बयान के बाद विपक्ष ने विरोध किया। मंत्री ने कहा कि कि गरीब जमीन नहीं खरीदता है। जो आदमी लाखों करोड़ों देकर जमीन खरीदता है, वह दाखिल खारिज के लिए 200 रुपया नहीं दे सकता? मंत्री दिलीप जायसवाल ने घोषणा किया कि 15 अगस्त तक तीस हजार गरीब को हम बासगीत पर्चा देंगे, जिसके बाद भारी विरोध के बीच विधेयक पास हो गया।