Patna NEET case : पटना NEET छात्रा मामला: परिवार बोले – सीबीआई जांच से नहीं मिलेगा न्याय, कहा - हमने नहीं किया है कोई डिमांड; बताया क्या है इच्छा

पटना NEET छात्रा मामले को अब सीबीआई को ट्रांसफर किया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि सीबीआई जांच से न्याय नहीं मिलेगा, वे सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 31 Jan 2026 01:02:07 PM IST

Patna NEET case : पटना NEET छात्रा मामला: परिवार बोले – सीबीआई जांच से नहीं मिलेगा न्याय, कहा - हमने नहीं किया है कोई डिमांड; बताया क्या है इच्छा

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Patna NEET case : बिहार में NEET छात्रा मामले ने नया मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार ने चित्रगुप्त नगर थाना कांड संख्या 14/2026 की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। इस बात की जानकारी बिहार के गृह मंत्री ने खुद ट्वीट कर दी है। हालांकि, पीड़ित छात्रा के परिवार ने सीबीआई जांच को लेकर संतोष व्यक्त नहीं किया है और उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि वे न्यायिक जांच की मांग पर कायम हैं।


परिवार के अनुसार, "सीबीआई जांच की सिफारिश से मैं संतुष्ट नहीं हूं। शुरू से ही प्रशासन में मिलीभगत है। हॉस्टल में जो घटनाएँ हुई हैं, उन पर हमने कई बार अपनी चिंता जाहिर की है। सरकार चाह रही है कि इस मामले को दबा दिया जाए।" पीड़ित परिवार का कहना है कि सरकार भले ही जांच करवा रही हो, लेकिन उन्होंने कभी भी सीबीआई जांच की मांग नहीं की। उनका जोर हमेशा न्यायिक जांच पर रहा है। परिवार की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच हो ताकि वास्तविक तथ्यों का पता लगाया जा सके।


परिवार ने कहा, "सीबीआई जांच का मतलब यही है कि SIT की टीम जो वर्तमान में मामले की जांच कर रही है, वही काम अब सीबीआई करेगी। इससे निष्पक्षता नहीं बढ़ती। डीजीपी ने भी स्पष्ट रूप से कहा था कि आपकी बेटी ने आत्महत्या कर ली। यह आरोप पूरी तरह निराधार हैं। हमें किसी पर भरोसा नहीं है। हमेशा से ही हमारी मांग रही है कि न्यायिक जांच हो।"


परिवार का आरोप है कि बिहार पुलिस और प्रशासन सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि यही सुशासन है। आम जनता के लिए कोई देखने या सुनने वाला नहीं है। परिवार का आरोप है कि अब तक उन्हें ही निशाना बनाया गया है।


पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मामले के साक्ष्य मिटाकर ही इसे सीबीआई को ट्रांसफर किया गया। परिवार ने कहा, "क्या ऐसे में हमें न्याय मिल पाएगा? पुलिस के एक आला अधिकारी ने धमकी दी कि मामला सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है। सीबीआई आप लोगों को 2 साल तक दौड़ाती रहेगी और अंत में बताएगी कि क्या मिला। इसलिए हम लोगों को डराने-धमकाने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल किया गया। हमें इस पर भरोसा नहीं है।"


इस बीच, समाज में भी इस मामले को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। छात्रों और आम जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन और पुलिस परिवार के विश्वास को कायम रख पाएंगे। कई लोग मानते हैं कि सिर्फ सीबीआई जांच के ऐलान से मामलों का हल नहीं निकलता। परिवार और जनता की उम्मीद निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।


फिलहाल, मामला सीबीआई के पास है, लेकिन परिवार की नाराजगी और भरोसे की कमी स्पष्ट है। उनका कहना है कि वे न्यायिक जांच तक पीछे नहीं हटेंगे। परिवार का जोर है कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की निगरानी में ही जांच हो ताकि किसी भी तरह की राजनीति या दबाव से स्वतंत्र जांच हो सके।


बिहार पुलिस और सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि परिवार और आम जनता का भरोसा बनाए रखा जाए। बिना भरोसे और पारदर्शिता के जांच का परिणाम समाज में न्याय की भावना को प्रभावित कर सकता है। परिवार का कहना है कि उनका संघर्ष केवल एक मामले के न्याय के लिए नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में सुधार के लिए भी है।


इस घटना ने बिहार में शिक्षा संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बहस को भी बढ़ावा दिया है। फिलहाल, पूरे मामले की निगरानी पूरे देश की नजरों में बनी हुई है, और यह देखना बाकी है कि सीबीआई जांच किस हद तक निष्पक्ष और प्रभावी साबित होती है।