Bihar Bhumi: विजय सिन्हा ने एक CO को धर लिया... जमकर लगाई क्लास, दाखिल खारिज में किय़ा था खेल, शोकॉज से लेकर एक्शन तक...

BIHAR BHUMI : बिहार में भूमि सुधार को लेकर सरकार अब सख्त मोड में नजर आ रही है। डिप्टी मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान जमीन से जुड़ी शिकायतों पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। दाखिल-खारिज, दखल-कब्जा और भूमाफिया से जुड़े मा

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 31 Jan 2026 02:27:04 PM IST

Bihar Bhumi: विजय सिन्हा ने एक CO को धर लिया... जमकर लगाई क्लास, दाखिल खारिज में किय़ा था खेल, शोकॉज से लेकर एक्शन तक...

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BIHAR BHUMI : बिहार में भूमि सुधार और जमीन से जुड़े मामलों को लेकर डिप्टी मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का सख्त रुख देखने को मिला। जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जमीन से संबंधित शिकायतों पर गंभीर नाराजगी जताई और अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी कि अगर मार्च महीने तक व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो कड़ी कार्रवाई तय है। डिप्टी सीएम का यह तेवर साफ संकेत देता है कि सरकार अब भूमि विवाद, दाखिल-खारिज और दखल-कब्जा जैसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।


जनसंवाद के दौरान एक फरियादी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसने जमीन खरीदी थी और दाखिल-खारिज के लिए आवेदन दिया, लेकिन संबंधित अंचलाधिकारी (CO) ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। फरियादी ने कहा, “सर, मैं दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर परेशान हो गया हूं। इसी बीच भूमाफिया ने मेरी जमीन पर कब्जा कर लिया।” यह सुनते ही डिप्टी सीएम का गुस्सा साफ नजर आया।


फरियादी ने आगे आरोप लगाया कि उस पर झूठे तरीके से एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायत भी दर्ज कराई गई। उसने बताया कि 19 महीनों तक मामला लटकाया गया और जब डिप्टी सीएम के आने की खबर मिली तो आनन-फानन में बिना किसी जांच-पड़ताल के केस को पढ़े बिना ही रिजेक्ट कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।


डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने तत्काल ADM को निर्देश देते हुए कहा, “ADM साहब, इस CO की जांच कराइए।” इसके बाद उन्होंने सदर CO से सीधे सवाल किया कि आखिर दखल-कब्जा का नियम क्या है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “कोई जबरदस्ती कब्जा कर ले और यह कह दे कि जमीन मेरी हो गई, तो ऐसा थोड़ी होता है। जमीन पर अधिकार के लिए कागजात जरूरी होते हैं।”


डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि जमीन से जुड़े मामलों में कानून और नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि दखल-कब्जा कोई मौखिक दावा नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें दस्तावेजों की अहम भूमिका होती है। अगर बिना कागज के किसी को जमीन का मालिक मान लिया जा रहा है, तो यह सीधे तौर पर कानून का मजाक है।


इस दौरान स्थिति तब और गंभीर हो गई जब डिप्टी सीएम ने अपर मुख्य सचिव से पूरे मामले की स्थिति समझाने को कहा। इस पर अपर मुख्य सचिव ने जवाब दिया, “सर, CO समझा रहा है, उसको समझाने दीजिए, फिर मैं आपको बताता हूं।” इस जवाब पर भी डिप्टी सीएम नाराज दिखे और सवाल उठाया कि यह कौन-सी परिभाषा है जिसमें दखल-कब्जा को सही ठहराया जा रहा है।


डिप्टी सीएम ने साफ कहा कि अगर जमीन से जुड़े मामलों में इसी तरह की लापरवाही और मनमानी चलती रही, तो दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि मार्च तक सुधार नहीं हुआ तो निलंबन से लेकर विभागीय कार्रवाई तक की जाएगी।


जनसंवाद में दिखा यह सख्त रुख न सिर्फ फरियादियों के लिए राहत की उम्मीद जगाता है, बल्कि प्रशासन के लिए भी साफ संदेश है कि अब जमीन से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होगी। सरकार का यह कदम भूमाफिया और भ्रष्ट व्यवस्था पर लगाम लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।