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पटना में NEET छात्रा का मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा सवाल, कहा..प्राइवेट हॉस्टल चलाने के लिए कोई कानून है या नहीं?

पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा है कि प्राइवेट गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल के संचालन के लिए कोई कानून है या नहीं। इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।

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20 फरवरी को सुनवाई
© social media
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA: राजधानी पटना में NEET छात्रा का मामला सामने आने के बाद पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से यह सवाल किया है कि प्राइवेट बॉयज और गर्ल्स  हॉस्टल चलाने के लिए कोई कानून है या नहीं? इस सवाल का जवाब सरकार को देने को कहा गया है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। 


बता दें 11 जनवरी को मेडिकल की तैयारी करने वाली छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद शेखपुरा जिले के करंडे गांव के रहने वाले एक अधिवक्ता माधव राज ने पटना हाई कोर्ट में 19 जनवरी को एक जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें पटना में चल रहे प्राइवेट बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल में बच्चों की सेफ्टी, सिक्योरिटी और भोजन की व्यवस्था को लेकर कानून बनाने की मांग की गयी। याचिकाकर्ता ने कहा कि प्राइवेट हॉस्टल को रेगूलेट करने के लिए बिहार में अभी तक कोई कानून नहीं बना है। इस जनहित याचिका पर आज पहली सुनवाई हुई। पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस विवेक चौधरी की बेंच ने जनहित याचिका दायर करने वाले वकील की दलीलें सुनी। 


याचिकाकर्ता ने बताया कि बिहार में प्राइवेट बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल चलाने के लिए कोई कानून नहीं है। इसकी समय-समय पर मॉनिटरिंग होनी चाहिए जिसकी वर्तमान में कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है। बिहार में बिना लाइसेंस के मनमाने तरीके से लड़कों-लड़कियों का हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। जहां इनके रहने-खाने-पीने,सुरक्षा की व्यवस्था ठीक नहीं है। वहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव रहता है। हॉस्टल के मालिक बच्चों से मनमाना पैसा लेते हैं। बच्चे पढ़ाई के लिए मजबुरीवश प्राइवेट हॉस्टल में किसी तरह रहने को विवश हैं। यहां रहने वाली बच्चियों के साथ आए दिन शोषण का मामला सामने आता है। याचिकाकर्ता ने बताया कि तमिलनाडु में बिना लाइसेंस और सरकार के परमिशन के कोई हॉस्टल नहीं चलता है। यदि कोई नियम तोड़ता है तो संचालक के ऊपर 2 साल की सजा और 50 हजार रुपए जुर्माना का प्रावधान है। इसी तरह का नियम बिहार में भी लागू किया जाना चाहिए।  


बता दें कि हाल ही में जहानाबाद की रहने वाली छात्रा जो पटना के एक प्राइवेट हॉस्टल में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रही थी। उसकी संदिग्ध मौत के बाद कई सवाल उठने लगे। परिजनों का कहना था कि उसकी रेप के बाद हत्या की गयी है। जबकि पुलिस का कहना है कि छात्रा ने आत्महत्या की है। अब इस मामले की जांच के लिए बिहार सरकार ने सीबीआई से सिफारिश की। पटना के चर्चित चित्रगुप्त नगर थाना कांड संख्या 14/2026 की जांच अब सीबीआई करेगी। बिहार सरकार के गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के तहत केंद्रीय एजेंसी को जांच की अनुमति दे दी है। 


इस मामले में 17 दिनों की जांच के बाद बिहार पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। इधर मृत छात्रा के परिजनों ने एसआईटी की जांच पर सवाल उठाया है। कहा है कि पुलिस सही दिशा में जांच नहीं कर रही है। शुक्रवार को पीड़िता की मां की डीजीपी विनय कुमार के साथ मुलाकात हुई थी। डीजीपी के आवास से निकलने के बाद वे काफी गुस्से में दिखीं। यहां तक कह दिया कि पुलिस बिक गई है। यहां उनकी बेटी को न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। कुल मिलाकर, पटना के नीट छात्रा कांड की सीबीआई जांच का फैसला राज्य की कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें सीबीआई की जांच पर टिकी हैं, ताकि पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिल सके और दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जा सके।

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