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Railway big relief : बजट से पहले रेलवे का बड़ा ऐलान, अब इन लोगों भर्ती में मिलेगी राहत; अनुकंपा नौकरी के भी नियम बदले

देश में आज आम बजट पेश होने से पहले रेलवे ने अपने कर्मचारियों और रेलवे भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ी राहत दी है। रेलवे बोर्ड ने अनुकंपा नियुक्ति और दिव्यांग उम्मीदवारों की भर्ती से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है।

Railway big relief : बजट से पहले रेलवे का बड़ा ऐलान, अब इन लोगों भर्ती में मिलेगी राहत; अनुकंपा नौकरी के भी नियम बदले
Tejpratap
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देश में आज आम बजट पेश होने वाला है और इसी अहम मौके से ठीक पहले रेलवे ने अपने कर्मचारियों और भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को बड़ी राहत दी है। रेलवे बोर्ड के दो अहम फैसलों ने एक तरफ रेलकर्मियों के परिवारों को सामाजिक सुरक्षा का भरोसा दिया है, तो दूसरी तरफ दिव्यांग उम्मीदवारों के साथ हो रही तकनीकी अड़चनों को दूर कर दिया है। इन फैसलों को रेलवे के लिए ऐतिहासिक और मानवीय कदम माना जा रहा है।


मृत रेलकर्मियों के परिवारों को बड़ा तोहफा

रेलवे ने अपने लाखों कर्मचारियों और उनके आश्रितों के हित में एक बड़ा निर्णय लिया है। अब मृत रेल कर्मचारियों की दूसरी पत्नी से उत्पन्न संतान को भी अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाएगी। इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि ऐसे मामलों में किसी भी कारण से नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता।


अब तक कई मामलों में यह देखा गया था कि दूसरी पत्नी से उत्पन्न संतान को अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार से वंचित कर दिया जाता था। इससे परिवारों को न केवल आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी भेदभाव झेलना पड़ता था। रेलवे बोर्ड के निदेशक (स्थापना) यू.के. तिवारी द्वारा जारी नए निर्देशों में इस भेदभाव को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।


निर्देशों में साफ कहा गया है कि यदि मृत रेलकर्मी की सेवा के दौरान परिवार की स्थिति वैध रूप से मान्य है और संतान आश्रित की श्रेणी में आती है, तो उसे अनुकंपा नियुक्ति का पूरा अधिकार होगा। रेलवे का यह फैसला उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जिनकी आजीविका कर्मचारी की मृत्यु के बाद पूरी तरह से रेलवे की अनुकंपा नीति पर निर्भर होती है।


दिव्यांग उम्मीदवारों को भर्ती में बड़ी राहत

इसी के साथ रेलवे बोर्ड ने भर्ती की तैयारी कर रहे दिव्यांग उम्मीदवारों को भी बड़ी राहत दी है। अब केवल दिव्यांगता प्रमाण पत्र पर “अस्थायी” (Temporary) शब्द लिखे होने के कारण किसी उम्मीदवार का आवेदन निरस्त नहीं किया जा सकेगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी मामलों को समान रूप से नहीं देखा जाएगा।


रेलवे के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार की दिव्यांगता की स्थिति ऐसी है जो समय के साथ बढ़ सकती है, लेकिन उसमें सुधार या पूरी तरह ठीक होने की कोई संभावना नहीं है, तो उसे आरक्षण के उद्देश्य से अस्थायी माना जाएगा। ऐसे उम्मीदवारों के आवेदन अब खारिज नहीं किए जाएंगे। पहले की व्यवस्था में प्रमाण पत्र पर “अस्थायी” शब्द होने मात्र से ही आवेदन रद्द कर दिया जाता था, जिससे कई योग्य दिव्यांग उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाते थे।


रेलवे बोर्ड का यह फैसला दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें बराबरी का अवसर मिलेगा और तकनीकी कारणों से होने वाले अन्याय पर रोक लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दिव्यांग अधिकारों की दिशा में रेलवे की सकारात्मक सोच को दर्शाता है।


बजट से पहले रेलवे का मानवीय संदेश

आम बजट से ठीक पहले रेलवे के इन फैसलों को सामाजिक न्याय और संवेदनशील प्रशासन का संकेत माना जा रहा है। एक तरफ जहां अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े नियमों को अधिक मानवीय बनाया गया है, वहीं दूसरी ओर दिव्यांग उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर देने की दिशा में ठोस पहल की गई है।


रेलवे के इन फैसलों से न केवल कर्मचारियों और उम्मीदवारों में संतोष है, बल्कि यह उम्मीद भी जगी है कि आने वाले समय में रेलवे भर्ती और कर्मचारी कल्याण से जुड़े नियमों को और सरल व न्यायसंगत बनाया जाएगा। कुल मिलाकर, बजट से पहले रेलवे का यह कदम लाखों परिवारों और युवाओं के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है।