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Bihar News: सात समंदर पार की मोहब्बत, सनातन परंपरा की बारात: मिशेल और बैलेस्टिक ने हिंदू रीति-रिवाज से रचाई शादी

बिहार के पटना जिले के अथमलगोला स्थित रूपस गांव में विदेश में पली-बढ़ी मिशेल ने अपने जीवनसाथी के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर अपनी जड़ों से जुड़ाव दिखाया। इससे पहले दोनों का विवाह चेक गणराज्य में संपन्न हो चुका था।

Bihar News: सात समंदर पार की मोहब्बत, सनातन परंपरा की बारात: मिशेल और बैलेस्टिक ने हिंदू रीति-रिवाज से रचाई शादी
Tejpratap
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BIHAR NEWS: बिहार के पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत अथमलगोला प्रखंड के रूपस गांव में उस समय उत्सव जैसा माहौल बन गया, जब विदेश में बस चुकी बेटी मिशेल ने अपने जीवनसाथी बैलेस्टिक के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह रचाया। हाथों में गहरी रची मेहंदी, पैरों में सजी महावर और परंपारिक वेशभूषा में सजी मिशेल बेहद खुश नजर आ रही थी। वहीं दूल्हे बैलेस्टिक भी भारतीय परंपराओं के रंग में पूरी तरह रंगे दिखे। 


मिशेल मूल रूप से रूपस गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता वर्षों पहले काम के सिलसिले में Czech Republic जाकर बस गए थे। वहीं मिशेल का पालन-पोषण हुआ। बताया जाता है कि वर्ष 2022 में मिशेल और बैलेस्टिक का विवाह यूरोपीय संस्कृति के अनुसार चेक गणराज्य में संपन्न हुआ था। हालांकि, अपने गांव और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ाव के कारण मिशेल की इच्छा थी कि वह अपने पैतृक गांव में भी सनातन धर्म के रीति-रिवाजों से विवाह संस्कार पूरा करें। 


इसी इच्छा को सम्मान देते हुए परिवार ने रूपस गांव में पारंपरिक हिंदू विधि-विधान के साथ विवाह समारोह आयोजित किया। विवाह मंडप सजा, वैदिक मंत्रोच्चार गूंजे, अग्नि के सात फेरे लिए गए और वर-वधू ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। गांव की महिलाएं मंगल गीत गाती रहीं और पूरा वातावरण उत्सवमय बना रहा।


इस अनोखी शादी के गवाह बनने के लिए गांव के लोग बड़ी संख्या में जुटे। ग्रामीणों ने वर-वधू को आशीर्वाद दिया और इस परंपरा को निभाने के लिए परिवार की सराहना की। विदेशी भूमि पर पली-बढ़ी बेटी का अपनी जड़ों से जुड़ाव गांव वालों के लिए गर्व का विषय बन गया।


दुल्हन बनी मिशेल के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने पारंपरिक परिधान और गहनों के साथ भारतीय संस्कृति को आत्मसात करते हुए सभी रस्में निभाईं। वहीं बैलेस्टिक ने भी भारतीय रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए पूरे उत्साह के साथ हर परंपरा में भाग लिया।


रूपस गांव में यह शादी चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे भारतीय संस्कृति की ताकत और पारिवारिक मूल्यों की मिसाल के रूप में देख रहे हैं। विदेश में विवाह होने के बावजूद अपनी मिट्टी और परंपरा से जुड़कर दोबारा विवाह संस्कार संपन्न करना अपने आप में खास माना जा रहा है।