1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 19 Jan 2026 07:55:40 AM IST
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Biha librarian job : बिहार के सरकारी उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालयाध्यक्षों की बहाली को लेकर फिलहाल अनिश्चितता गहरा गई है। शिक्षा विभाग के ताजा फैसले के बाद अब पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, जिससे बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस (B.Lib) और मास्टर ऑफ लाइब्रेरी साइंस (M.Lib) जैसे कोर्स करने वाले हजारों युवाओं को बड़ा झटका लगा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब लंबे अरसे से अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
दरअसल, इससे पहले शिक्षा विभाग ने बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) को पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा को लेकर मार्गदर्शिका जारी कर दी थी। इसके तहत जिलों से उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पदों का ब्योरा भी मांगा गया था। विधानसभा चुनाव 2025 से पहले जिलों से शिक्षा विभाग को लगभग 4500 रिक्तियों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। ये रिक्तियां वर्ष 2010 में सृजित पुस्तकालयाध्यक्ष पदों के आधार पर भेजी गई थीं। उस समय राज्य में करीब 6000 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय थे।
हालांकि, वर्तमान स्थिति पहले से काफी अलग है। अब बिहार में उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की संख्या बढ़कर 9360 हो चुकी है। शिक्षा विभाग का कहना है कि पुस्तकालयाध्यक्ष के पद उन्हीं विद्यालयों में सृजित किए जाएंगे, जहां पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में पुराने आंकड़ों के आधार पर बहाली करना व्यवहारिक नहीं माना गया। इसी कारण अब नए सिरे से पद सृजन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और उसके बाद ही बहाली से संबंधित आगे की कार्रवाई होगी।
इस फैसले के चलते नियुक्ति प्रक्रिया में देरी तय मानी जा रही है। पद सृजित होने के बाद शिक्षा विभाग फिर से बिहार बोर्ड को पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा आयोजित कराने के लिए मार्गदर्शन देगा। इसके बाद आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा आयोजन और परिणाम प्रकाशन जैसी सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी, जिसमें लंबा समय लग सकता है।
गौरतलब है कि बिहार के स्कूलों में पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति कोई नई प्रक्रिया नहीं है। पहली बार इसके लिए वर्ष 2008 में नियमावली बनाई गई थी। इसके तहत 2010-11 में संविदा के आधार पर 2596 पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हुई थी, जिसमें लगभग 2100 पुस्तकालयाध्यक्षों की बहाली नियोजित शिक्षक की तरह की गई थी। वर्तमान में राज्य के विभिन्न उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में करीब 1696 पुस्तकालयाध्यक्ष कार्यरत हैं।
वहीं, पुराने पुस्तकालयाध्यक्षों को सक्षमता परीक्षा के आधार पर नियमित राज्यकर्मी का दर्जा दिया जा रहा है। इससे एक ओर कार्यरत कर्मचारियों को स्थायित्व मिल रहा है, तो दूसरी ओर नए अभ्यर्थियों के लिए अवसर सीमित होते नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि बी.लिब और एम.लिब डिग्रीधारी अभ्यर्थी लगातार नई नियुक्तियों की मांग कर रहे हैं और सरकार से शीघ्र प्रक्रिया शुरू करने की अपील कर रहे हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार, पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति नियमावली शिक्षक नियुक्ति नियमावली की तर्ज पर ही बनाई गई है। वेतनमान भी हाईस्कूल शिक्षक के समकक्ष तय है। नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षा बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से लिए जाने का प्रावधान है। परीक्षा में 100 अंकों के बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे और गलत उत्तर के लिए किसी प्रकार की नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी।
फिलहाल, पद सृजन की प्रक्रिया पूरी होने तक अभ्यर्थियों को इंतजार करना पड़ेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में पुस्तकालय और प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्ष छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह जल्द से जल्द नई व्यवस्था को अंतिम रूप देकर बहाली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाए, ताकि योग्य युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके और विद्यालयों में शैक्षणिक माहौल और बेहतर हो सके।