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Patna NEET student : नीट छात्रा मामले में बड़ा खुलासा, शंभू गर्ल्स हॉस्टल संचालक के बेटा का नाम आया सामने; उठने लगी गिरफ्तारी की मांग

Patna NEET student : पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और संदिग्ध मौत मामले ने बिहार में आक्रोश बढ़ा दिया है। SIT जांच में अस्पताल और हॉस्टल तक साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।

Patna NEET student : नीट छात्रा मामले में बड़ा खुलासा, शंभू गर्ल्स हॉस्टल संचालक के बेटा का नाम आया सामने; उठने लगी गिरफ्तारी की मांग
Tejpratap
Tejpratap
7 मिनट

बिहार की राजधानी पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और संदिग्ध मौत का मामला अब पूरे राज्य में गहरी नाराज़गी और आक्रोश का विषय बन चुका है। घटना की गंभीरता और आरोपियों के प्रति कार्रवाई की धीमी रफ्तार को लेकर लोग सरकार से सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच राजद नेत्री और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस मामले को लेकर ट्वीट कर बिहार सरकार पर तीखा हमला किया है और आरोपियों की गिरफ्तारी और साक्ष्यों की सुरक्षा को लेकर कई अहम सवाल उठाए हैं।


रोहिणी आचार्य ने ट्वीट में स्पष्ट रूप से कहा है कि - "पूछता है बिहार.. कब होंगे आरोपी गिरफ़्तार ? सवालों पर गौर फरमाए बिहार सरकार :  पटना हॉस्टल रेप कांड के मामले में ना तो अभी तक हॉस्टल संचालक अग्रवाल दंपत्ति की गिरफ़्तारी हुई , ना ही अग्रवाल दंपत्ति के आरोपी पुत्र की गिरफ़्तारी हुई है ?? ना ही साक्ष्यों के साथ आपराधिक छेड़ - छाड़ करने , साक्ष्यों को मिटाने वाले प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टर सतीश की गिरफ़्तारी हुई है , ना ही अब तक प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल सील किया गया है ??  जाँच चल रही है या लीपा - पोती या फिर रसूखदार  आरोपियों को बचाने की कवायद जारी है ??  अंत में बड़ा सवाल  : अपने  बिहार में जहाँ आज माँ - बहन - बेटियों का हो रखा जीना मुहाल , कहीं ऐसा तो नहीं कि वहाँ बलात्कार और हत्या के आरोपियों को साक्ष्यों - सबूतों को मिटाने , मामले को मैनेज करने के लिए समय दिए जाने की सुविधा की जा रही बहाल ?"  



रोहिणी आचार्य  का कहना है कि बिहार में सवाल उठ रहा है कि आखिर कब आरोपी गिरफ्तार होंगे। उन्होंने पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल रेप कांड में हॉस्टल संचालक अग्रवाल दंपत्ति की गिरफ्तारी न होने पर सरकार से जवाब मांगा। इसके साथ ही उन्होंने अग्रवाल दंपत्ति के पुत्र की गिरफ्तारी भी नहीं होने की बात उठाई। रोहिणी ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टर सतीश ने साक्ष्य मिटाने और आपराधिक छेड़छाड़ की कोशिश की, फिर भी उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि अस्पताल को अब तक सील क्यों नहीं किया गया।


रोहिणी ने बिहार सरकार से पूछा कि क्या जांच चल रही है या फिर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार रसूखदार आरोपियों को बचाने की कवायद कर रही है। उनका तर्क था कि यदि आरोपियों को साक्ष्य मिटाने और मामले को मैनेज करने का समय दिया जा रहा है, तो यह प्रदेश में कानून-व्यवस्था की सच्ची तस्वीर नहीं दिखाता। उन्होंने कहा कि बिहार में आज मां, बहन, बेटियों का जीना मुहाल है, ऐसे में क्या सरकार आरोपियों को बचाने के लिए समय दे रही है या उन्हें संरक्षण दे रही है।


इस ट्वीट के बाद बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़ा हमला माना है। विपक्ष का कहना है कि अगर सचमुच जांच निष्पक्ष हो रही है, तो आरोपियों की गिरफ्तारी में देर क्यों हो रही है? क्या सरकार पर दबाव है या सरकार खुद आरोपियों को बचाने में जुटी है? ऐसे सवालों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।


वहीं दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने इस मामले को लेकर कहा है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर तफ्तीश की जा रही है। SIT (Special Investigation Team) की टीम ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है और कई जगहों पर छानबीन की जा रही है। जांच के क्रम में SIT की टीम प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल भी पहुंची, जहां छात्रा को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में जांच के दौरान कई अहम दस्तावेजों और साक्ष्यों की पड़ताल की गई, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस तरह से घटना के बाद साक्ष्य मिटाने या छेड़छाड़ करने का प्रयास हुआ या नहीं।


हालांकि, लोगों का मानना है कि मामले में तेजी से कार्रवाई की जानी चाहिए। इस तरह की घटनाओं में समय महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि देर होने पर साक्ष्यों का नष्ट होना, गवाहों का डर जाना और आरोपियों का पल्ला बचाना आसान हो जाता है। रोहिणी आचार्य के सवाल इसी बात की ओर इशारा करते हैं कि क्या प्रशासन समय पर कार्रवाई कर रहा है या किसी प्रकार की राजनीति या रसूखदार प्रभाव की वजह से कार्रवाई धीमी हो रही है।


बिहार के समाज में इस घटना ने महिलाओं की सुरक्षा और सरकार की भूमिका पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लोग यह पूछ रहे हैं कि अगर राज्य की राजधानी में एक छात्रा के साथ ऐसी भयावह घटना हो सकती है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस तरह से पूरी हो रही है। इसके साथ ही यह भी सवाल उठता है कि क्या राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि अपराधी सजा से बचने के लिए साक्ष्यों को मिटाने और मामले को दबाने की कोशिश कर सकते हैं।


इन सबके बीच, प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह निष्पक्ष और तेज जांच कर आरोपी लोगों को जल्द गिरफ्तार करे और साक्ष्यों को सुरक्षित रखे। साथ ही, राज्य सरकार को यह भरोसा देना होगा कि कोई भी आरोपी चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के आगे बराबर है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो बिहार में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर भरोसा टूट सकता है।


आखिर में, रोहिणी आचार्य के सवालों ने बिहार सरकार को यह संदेश दिया है कि जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं चाहती, बल्कि तेज और निष्पक्ष कार्रवाई चाहती है। इस मामले में न्याय की मांग बढ़ती जा रही है और अगर आरोपी समय रहते पकड़े नहीं गए तो यह घटना बिहार के लिए एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संकट बन सकती है।