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Bihar News: बिहार की सरकारी वेबसाइटों पर साइबर हमले का खतरा, अब नीतीश सरकार उठाने जा रही यह कदम

Bihar News: बिहार सरकार ने साइबर हमलों के खतरे के बीच सभी सरकारी वेबसाइटों का साइबर सुरक्षा ऑडिट शुरू किया है। ईओयू को नोडल एजेंसी बनाया गया है। एम्स, स्मार्ट सिटी और डायल 112 पर हालिया हमलों के बाद लिया गया है फैसला।

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प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
4 मिनट

Bihar News: बिहार में साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं ने नीतीश कुमार सरकार को सतर्क कर दिया है। हाल ही में एम्स, स्मार्ट सिटी, डायल 112 और जल वितरण जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं की वेबसाइटों पर हुए साइबर हमलों के बाद सरकार ने सभी सरकारी विभागों और प्रतिष्ठानों की वेबसाइटों का साइबर सुरक्षा ऑडिट कराने का फैसला किया है। इस जिम्मेदारी के लिए आर्थिक अपराध इकाई को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। ऑडिट का उद्देश्य वेबसाइटों और ऑनलाइन सेवाओं को साइबर सुरक्षा मानकों पर परखना और कमियों को तुरंत दूर करना है।


EOU के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नैय्यर हसनैन खान ने बताया कि साइबर ऑडिट की प्रक्रिया सभी सरकारी विभागों और प्रतिष्ठानों में शुरू की जाएगी। यह ऑडिट सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (C-DAC), इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (I4C)और अन्य विशेषज्ञ एजेंसियों के सहयोग से किया जाएगा। ऑडिट के दौरान वेबसाइटों, ऑनलाइन सेवाओं और लेनदेन प्रणालियों की सुरक्षा जांच की जाएगी। जहां भी कमियां या अनियमितताएं पाई जाएंगी, उन्हें तुरंत ठीक किया जाएगा।


इसके लिए एक विशेष रणनीति तैयार की जा रही है, जिसमें साइबर प्रोटोकॉल का पालन और साइबर हाइजीन की जांच शामिल है। इसका लक्ष्य साइबर खतरों की पहचान कर त्वरित सुधारात्मक उपाय करना है। EOU ने साइबर अपराधियों के नेक्सस को तोड़ने के लिए भी सख्त कार्रवाई की भी योजना बनाई है।


हाल के वर्षों में बिहार में साइबर अपराधों में तेजी आई है। 2019 से 2023 के बीच EOU को 27,041 शिकायतें मिलीं, जिनमें 1,016 FIR दर्ज की गईं। इनमें से ₹11.86 करोड़ की ठगी में से ₹75 लाख की राशि ही वापस की जा सकी। हाल के प्रमुख मामलों में शामिल हैं:  

- एम्स साइबर अटैक: 2022 में एम्स पटना का सिस्टम हैक होने से पूरा डिजिटल नेटवर्क ठप हो गया था।  

- स्मार्ट सिटी और डायल 112: इन वेबसाइटों पर साइबर हमले हुए, जिससे सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित हुईं।  

- स्वास्थ्य विभाग पर हमला: 2024 में अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के नाम से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर जूनियर अधिकारियों से पैसे मांगे गए।  


पिछले साल बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी भी साइबर ठगी का शिकार बने थे, जब उनके बैंक खाते से पैसे निकालने की कोशिश की गई। जिसके बाद EOU की त्वरित कार्रवाई से राशि वापस मिल गई थी। EOU के आंकड़ों के अनुसार बिहार में साइबर अपराध 2012 से 2019 के बीच 5.5 गुना बढ़े हैं। 2012 में 51 मामले थे जो 2019 में 280 हो गए। कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन धोखाधड़ी में भी भारी वृद्धि हुई थी। जामतारा मॉडल से प्रेरित साइबर अपराधी बिहार के सीमावर्ती जिलों में लगातार सक्रिय हैं।  


सरकार और EOU की कार्रवाई  

- 44 साइबर पुलिस स्टेशन: बिहार में 38 जिलों और 4 रेलवे जिलों में 44 साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए हैं जो 24x7 काम करते हैं। शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 उपलब्ध है।  

- C-DAC के साथ MoU: सितंबर 2024 में EOU ने C-DAC के साथ समझौता किया था, जिसके तहत साइबर फोरेंसिक, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और पुलिस प्रशिक्षण पर काम होगा।  

- प्रशिक्षण और जागरूकता: 2,200 पुलिसकर्मियों, 40 महिला पुलिसकर्मियों और 75 अभियोजकों को साइबर अपराध जांच का प्रशिक्षण दिया गया है। जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

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