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BIHAR: हत्या के मामले में मोतिहारी कोर्ट ने सुनाई सजा, आरोपित को आजीवन कारावास की सजा

घटना 28 जनवरी 2024 की है जब हरसिद्धि थाना क्षेत्र के सरिसवा निवासी मैनुद्दीन अंसारी के बेटे समीर आलम के सीने में चाकू घोंपकर हत्या कर दी गयी थी। मृतक की मां नूर सलीना खातून ने केस दर्ज कर आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की थी।

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कोर्ट का फैसला
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Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

BIHAR: मोतिहारी कोर्ट ने हत्या के एक मामले में नामजद एक अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 30 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। अर्थदंड नहीं देने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी। मोतिहारी दशम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बृजेश कुमार ने हरसिद्धि थाना क्षेत्र के झरवा निवासी इंदू उर्फ सैफ़ उर्फ सैफ अली के खिलाफ यह फैसला सुनाया।


वहीं एक अन्य अभियुक्त सरिसवा मुरारपुर निवासी जगत सिंह के पुत्र भनु सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश दिया। मामले में हरसिद्धि थाना के सरिसवा निवासी मैनुद्दीन अंसारी की पत्नी नूर सलीना खातून ने अपने पुत्र समीर आलम के सीने में चाकू घोंपकर हत्या कारित करने को लेकर हरसिद्धि थाना कांड संख्या 45/2024 दर्ज कराते हुए इंदू उर्फ सैफ़ अली एवं सरिसवा निवासी नागेंद्र मांझी को नामजद की थी। 


जिसमें यह कहा गया था कि 28 जनवरी 2024 की संध्या करीब पांच बजे नामजद अभियुक्तों सहित दो अन्य लोग आए और उसके पुत्र को बुलाकर ले गए। देर रात तक उसका पुत्र घर नहीं आया तो उसकी खोजबीन की गई। सुबह में हरसिद्धि थाना के ही दरियापुर गांव के समीप एक झाड़ी से पुलिस ने समीर का शव बरामद किया। समीर के सीने में चाकू मारी गई थी। अनुसंधान के दौरान दो दिन बाद ही पुलिस ने नामजद अभियुक्त इदु उर्फ सैफ़ अली को धर दबोचा। पुलिसिया पूछताछ के बाद हत्या की गुथी सुलझती चली गई। हत्या का कारण पुरानी दुश्मनी और प्रेम-प्रसंग बना। 


पुलिस अनुसंधान के एक माह बाद ही इदू उर्फ सैफ़ अली व हरसिद्धि थाना के ही अप्राथमिकी अभियुक्त मुरारपुर सरिसवा निवासी जगत सिंह के पुत्र भनु सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित कर दिया तथा अभियुक्त नागेंद्र मांझी के विरुद्ध अनुसंधान जारी रखा। सत्र वाद संख्या 619/2024 विचारण के दौरान अपर लोक अभियोजक दीपक पटेल एवं सहायक अधिवक्ता मो. शहाबुद्दीन ने छह गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कर अभियोजन साक्ष्य कराया। न्यायालय ने घटना के महज 17 महीना के भीतर ही सत्रवाद विचारण की प्रक्रिया पूरी कर तथा दोनों पक्षों के दलीलें सुनने के बाद  बुधवार को धारा 302,201/34 भादवि में दोषी पाते हुए अभियुक्त इदू उर्फ सैफ़ अली को उक्त सजा सुनाई।

सोहराब आलम साहिल की रिपोर्ट