Bihar News: अजब प्रेम की गजब कहानी! तीन दिन साथ रखकर छोड़ने गया प्रेमी, गांव वालो ने करा दी 'पकडुआ विवाह'

Bihar News: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक हैरान करने वाला और दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां नरकटियागंज क्षेत्र में पकड़ुआ शादी (Forceful Marriage) की परंपरा को एक नया मोड़ देते हुए निकाह करा दिया गया.

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 22, 2025, 12:54:05 PM

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Bihar News: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक हैरान करने वाला और दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां नरकटियागंज क्षेत्र में पकड़ुआ शादी (Forceful Marriage) की परंपरा को एक नया मोड़ देते हुए, लिव-इन में रह रहे एक प्रेमी युगल का पंचायत और मौलवियों की मौजूदगी में निकाह करा दिया गया। यह मामला शिकारपुर थाना क्षेत्र के बरगजवा गांव का है।


नरकटियागंज के कुमारबाग ओपी थाना अंतर्गत वकील मिया के बेटे एजाज अंसारी और बरगजवा निवासी सुलेमान मिया की बेटी समसून खातून दो साल से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। एजाज अक्सर अपने ननिहाल, बरगजवा आता-जाता रहता था, और वहीं उसकी मुलाकात समसून से हुई थी। दोनों के बीच प्रेम प्रसंग गहराया और समसून को भगाकर एजाज अपने घर ले गया। तीन दिन तक साथ रखने के बाद, एजाज के घरवालों ने समसून को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सामाजिक दबाव के कारण एजाज उसे नरकटियागंज स्टेशन पर छोड़कर भागने लगा। समसून ने वहीं पर हंगामा किया और अपने परिजनों को बुलाया।


समसून की आपबीती सुनने के बाद गांव वाले सक्रिय हुए और दोनों को गांव लाकर पंचायती की गई। मौके पर प्रमुख प्रतिनिधि चंदन साह, मुखिया प्रतिनिधि शेख राटा, सरपंच प्रतिनिधि आजाद अंसारी, और पैक्स अध्यक्ष सुशील कुमार पहुंचे। पुलिस को भी सूचना दी गई, लेकिन ग्रामीणों ने मामला आपसी सहमति से सुलझाने की बात कहकर पुलिस को लौटा दिया। इसके बाद मौलवियों की मौजूदगी में पंचायत ने एजाज से निकाह के लिए हामी भरवाई और फिर रीति-रिवाज से दोनों का निकाह संपन्न कराया गया।


इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ सामाजिक परंपराओं पर सवाल उठाए बल्कि यह भी दर्शाया कि कैसे ग्रामीण समाज अब लिव-इन रिलेशनशिप जैसे आधुनिक रिश्तों को अपने हिसाब से स्वीकारने लगा है। हालांकि इसमें सहमति और मर्यादा बनी रही, जो इस विवाह को एक सकारात्मक दिशा देती है। इस तरह की घटनाएं बिहार के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन को दर्शाती हैं, जहां परंपराएं और आधुनिकता मिलकर एक नई सामाजिक समझ बना रही हैं। हालांकि इस पर प्रशासन और समाजशास्त्रियों की भी नजर होनी चाहिए कि कहीं यह परंपराओं के नाम पर जबरदस्ती न बन जाए।

रिपोर्ट- संतोष कुमार