Madhepura Medical College : मेडिकल कॉलेज में मरीज की मौत पर परिजनों ने डॉक्टर पर किया हमला, रणक्षेत्र बना अस्पताल

मधेपुरा के एनकेटीएमसीएच में मरीज की मौत के बाद परिजनों ने उपाधीक्षक डॉक्टर पर हमला कर दिया। अस्पताल में तनाव बढ़ गया, पुलिस ने मोर्चा संभाला और आपातकालीन सेवाएं बंद करनी पड़ीं।”

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 23 Jan 2026 09:29:29 AM IST

Madhepura Medical College : मेडिकल कॉलेज में मरीज की मौत पर परिजनों ने डॉक्टर पर किया हमला, रणक्षेत्र बना अस्पताल

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Madhepura Medical College : जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनकेटीएमसीएच) में शुक्रवार को मरीज की मौत के बाद उत्पन्न हुई हिंसा ने अस्पताल को युद्ध क्षेत्र बना दिया। मुरलीगंज के हरिपुर कला वार्ड-6 निवासी सुनील यादव को 15-20 लोगों के समूह ने आपातकालीन विभाग में अचेत अवस्था में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन मरीज की हालत गंभीर होने के कारण उसकी मौत हो गई। यह खबर सुनते ही परिजन उग्र हो गए और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।


मृतक के परिजनों ने उपाधीक्षक डॉक्टर अंजनी कुमार पर आरोप लगाया कि मरीज की सही तरीके से इलाज नहीं किया गया और इस वजह से उसकी मौत हुई। आरोपों और गुस्से के बीच परिजन ने डॉक्टर पर गाली-गलौज के साथ मारपीट शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डॉक्टर अंजनी कुमार को अस्पताल के ब्लॉक पांच तक दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। घटना इतनी हिंसक थी कि डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं, जूनियर डॉक्टरों ने भी हमलावरों के हंगामे को देख कर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उनके खिलाफ भी हमला कर दिया। इसी बीच कुछ जूनियर डॉक्टरों ने आरोपी युवक को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी।


हादसे के बाद अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई। स्थानीय लोगों और अन्य डॉक्टरों के हस्तक्षेप से डॉक्टरों को भीड़ के चंगुल से बचाया गया। इस दौरान अस्पताल में मौजूद अन्य मरीज और उनके परिजन डर के मारे भगखड़ में लग गए। अस्पताल के अंदर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई।


घटना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी बल तैनात किया गया। अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं ठप हो गईं और कुछ समय के लिए अस्पताल का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। डॉक्टरों ने मांग की कि ऐसे हमले करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


डॉक्टरों ने बताया कि मरीज का ब्लड प्रेशर अत्यधिक ऊंचा था और उसकी स्थिति पहले से नाजुक थी। इलाज के दौरान कई प्रयास किए गए, लेकिन मरीज की हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में इलाज जारी था और उन्होंने सभी संभव प्रयास किए। बावजूद इसके परिजन ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया और हिंसा पर उतर आए। हादसे में घायल हुए डॉक्टर अंजनी कुमार को प्राथमिक उपचार के बाद अन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, कुछ अन्य लोग भी घायल बताए जा रहे हैं। मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।


घटना के बाद अस्पताल परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई पुलिस वाहन और जवान अस्पताल के बाहर तैनात किए गए। आपातकालीन सेवाएं बंद होने से दूर-दराज से आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीजों को अन्य अस्पतालों में भेजा गया और कई को भर्ती होने में देर हुई।


इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अस्पतालों में डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों और सुरक्षा व्यवस्था की कमी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टरों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और मरीजों के परिजनों के साथ समझौता करने वाले तंत्र को सक्रिय किया जाए ताकि भावनात्मक उबाल में आकर कोई हिंसक कदम न उठाए। साथ ही, डॉक्टरों ने यह भी कहा कि इलाज में देरी या मौत जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में उचित जांच के बाद ही निष्कर्ष निकाले जाने चाहिए, न कि गुस्से में आकर किसी की जान लेने जैसा कदम उठाया जाए।