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Bihar News: इस जिले में लगेगा राज्य का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट, केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव

Bihar News: बिहार का पहला परमाणु बिजली घर बांका में बनेगा। नीतीश सरकार ने केंद्र को 500 मेगावाट क्षमता का भेजा प्रस्ताव। गंगा के पानी की उपलब्धता के कारण चुना गया है यह जिला। जानें पूरी योजना और क्या है इसका महत्व।

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
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Bihar News: बिहार बिजली क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठने जा रहा है। राज्य का पहला परमाणु बिजली संयंत्र बांका जिले में स्थापित होगा। नीतीश कुमार सरकार ने केंद्र को इस परियोजना का प्रस्ताव भेज दिया है और जल्द ही केंद्र सरकार की एक टीम बांका में परियोजना स्थल का दौरा भी करेगी। यह घोषणा पिछले सप्ताह पटना में हुए पूर्वी भारत के ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा की गई थी, जिसमें उन्होंने देश के छह राज्यों में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर आधारित परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने की बात कही थी। बिहार उन छह राज्यों में शामिल है, जो इस क्रांतिकारी कदम का हिस्सा बनेगा।


इस परियोजना की शुरुआत बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव की मांग पर हुई है, जिन्होंने केंद्र से राज्य में परमाणु बिजली संयंत्र की स्थापना का आग्रह किया था। पहले बांका में 4,000 मेगावाट की अल्ट्रा मेगावाट पावर परियोजना का प्रस्ताव था, जो किसी कारण लागू नहीं हो सका। अब उसी जिले में परमाणु बिजली संयंत्र बनाने का फैसला लिया गया है। परमाणु बिजली संयंत्र के लिए पानी की निरंतर उपलब्धता जरूरी होती है और बांका में गंगा नदी का पानी सालभर उपलब्ध रहता है। इसीलिए यह स्थान नवादा के रजौली से ज्यादा उपयुक्त माना गया, जहां पानी की कमी एक चुनौती थी।


केंद्र सरकार ने शुरू में बिहार में 200 मेगावाट क्षमता के परमाणु बिजली संयंत्र को मंजूरी दी थी, लेकिन बिहार सरकार ने 500 मेगावाट क्षमता की मांग की है। इसके लिए जरूरी जमीन और अन्य संसाधन राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी। स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर तकनीक पर आधारित यह संयंत्र पारंपरिक परमाणु संयंत्रों की तुलना में अधिक सुरक्षित, लागत-प्रभावी और छोटे ग्रिडों के लिए उपयुक्त है। यह परियोजना न केवल बिहार की बिजली कमी को दूर करेगी, बल्कि औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


यह परियोजना बिहार को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। परमाणु बिजली संयंत्र में यूरेनियम या अन्य रेडियोधर्मी तत्वों का उपयोग कर बिजली उत्पादन होता है, जिसमें न्यूक्लियर रिएक्टर, शीतलन प्रणाली, नियंत्रण प्रणाली और सुरक्षा सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। केंद्र सरकार ने बिहार के लिए 1,000 मेगावाट की बैटरी भंडारण परियोजना को भी मंजूरी दी है, जो ग्रिड स्थिरता को बढ़ाएगी।