Narak Chaturdashi 2025: धनतेरस के बाद आज नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली मनाई जा रही है। इससे दीपावली का पांच दिवसीय पर्व शुरू हो चुका है। यह दिन दीर्घायु, सौंदर्य और समृद्धि की कामना के लिए विशेष रूप से पूजनीय होता है। साथ ही इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध किए जाने की पौराणिक मान्यता भी जुड़ी हुई है।


क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का संहार किया था और 16,100 कन्याओं को मुक्त कराया था। इस दिन को अंधकार पर प्रकाश की जीत के प्रतीक रूप में देखा जाता है। इसके अलावा, मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन यमराज के लिए दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।


यम दीप जलाने का शुभ मुहूर्त

तिथि प्रारंभ: 19 अक्टूबर, दोपहर 01:51 बजे

तिथि समाप्त: 20 अक्टूबर, दोपहर 03:44 बजे


यम दीपक पूजन मुहूर्त (प्रदोष काल):

शाम 5:50 बजे से 7:02 बजे तक


यम दीपक कैसे जलाएं और क्या डालें इसमें?

हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, यमराज के लिए दीपक जलाते समय कुछ विशेष सामग्रियों को दीप में डालना अत्यंत शुभ माना गया है:

लौंग – धन और समृद्धि का प्रतीक

इलायची – सौभाग्य का प्रतीक

हल्दी – शुभता और पवित्रता के लिए

चावल के कुछ दाने – शुद्धता और स्थिरता

कौड़ी और एक सिक्का – आर्थिक समृद्धि के लिए

इन सामग्रियों को दीप में डालने से घर में धन वर्षा और सुख-शांति आती है।


यम दीपक से जुड़ी खास बातें:

दीपक मिट्टी या आटे का होना चाहिए।

तेल: सरसों के तेल का उपयोग करें।

बत्तियां: दीपक में चार बत्तियां लगानी चाहिए – ताकि चारों दिशाओं में प्रकाश फैले।

दिशा: दीपक दक्षिण दिशा में जलाएं, क्योंकि यह यमराज की दिशा मानी जाती है।

घर के चारों कोनों में दीप जलाना भी शुभ होता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।


नरक चतुर्दशी पर यमराज के लिए श्रद्धा और नियमपूर्वक दीपक जलाना जीवन में आने वाले संकटों से बचाता है और अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है। यह पर्व केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी एक महत्वपूर्ण परंपरा का हिस्सा है।