1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 10, 2026, 8:18:45 PM
आसमान में छाये रहेंगे बादल - फ़ोटो सोशल मीडिया
PATNA: 12 मार्च से 15 मार्च तक मौसम विभाग ने बूंदाबांदी या हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। उत्तर बिहार के मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण व पश्चिमी चंपारण में बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है, इस दौरान हवा भी चलेगी, फिलहाल पुरवा हवा चलेगी, आसमान में बादल छाए रहेंगे और मौसम शुष्क बना रहेगा।
डा० राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर (बिहार) के जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केन्द्र ग्रामीण कृषि मौसम सेवा ने इसे लेकर बुलेटिन जारी किया है। मौसमीय बेधशाला पूसा के आकलन के अनुसार पिछले तीन दिनों का औसत अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान क्रमशः 30.8 एवं 15.7 डिग्री सेल्सियस रहा। औसत सापेक्ष आर्द्रता 96 प्रतिशत सुबह में एवं दोपहर में 60 प्रतिशत, हवा की औसत गति 6.0 कि०मी० प्रति घंटा एवं दैनिक वाष्पण 2.6 मि०मी० तथा सूर्य प्रकाश अवधि औसतन 3.2 घन्टा प्रति दिन रिकार्ड किया गया तथा 5 से०मी० की गहराई पर भूमि का औसत तापमान सुबह में 21.2 एवं दोपहर में 32.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इस अवधि में मौसम शुष्क रहा।
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, डा०आर०पी०सी०ए०यू०, पूसा, समस्तीपुर एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी 11-15 मार्च, 2026 तक के मौसम पूर्वानुमान के अनुसारः- उत्तर बिहार के जिलो के आसमान में गरज वाले हल्के बादल बन सकते है। जिसके प्रभाव से 12 मार्च के आसपास मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी तथा पश्चिम चम्पारण जिलों के 1-2 स्थानों पर बूंदा बूंदी हो सकती है। अन्य जिलों में मुख्यतः मौसम शुष्क रहने की सम्भावना है। इस अवधि में अधिकतम तापमान 31 से 34 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 20 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। औसतन 8-12 कि०मी० प्रति घंटा की रफ्तार से मुख्यतः पुरवा हवा चलने का अनुमान है। सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 70 से 80 प्रतिशत तथा दोपहर में 20 से 25 प्रतिशत रहने की संभावना है।
12 मार्च के आसपास मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी तथा पश्चिमी चम्पारण जिलों में हल्की वर्षा या बूंदाबांदी की संभावना है। इसलिए किसान भाई मौसम को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक कृषि कार्य करें। तैयार सरसों की कटाई, दौनी तथा आलू की खुदाई केवल तब ही करें जब मौसम साफ हो, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके। आज का अधिकतम तापमानः 31.4 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। इस समय ओल की रोपाई की जा सकती है। रोपाई के लिए गजेन्द्र किस्म की सिफारिश की जाती है। लगभग 0.5 किलोग्राम वजन वाले कंद को 75×75 सेमी की दूरी पर लगाएं। 0.5 किलोग्राम से कम वजन वाले कंद का उपयोग न करें। बीज दर लगभग 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें। बुआई से पहले प्रत्येक गड्ढे में 3 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद 20 ग्राम अमोनियम सल्फेट या 10 ग्राम यूरिया, 37.5 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट और 18 ग्राम पोटेशियम सल्फेट डालें। कंद को लगाने से पहले ट्राइकोडर्मा विरिडी 5 ग्राम प्रति लीटर गोबर के घोल में मिलाकर 20-25 मिनट तक डुबोकर रखें। इसके बाद कंद को निकालकर छाया में 10-15 मिनट सुखाएं और फिर रोपाई करें। इससे मिट्टी जनित रोगों की संभावना कम होती है और अच्छी उपज मिलती है।
गरमा सब्जियों की बुआई तुरंत कर लेनी चाहिए। लीकी की अर्का बहार, काशी कोमल, काशी गंगा, पूसा समर, प्रोलिफिक लॉन्ग, पूसा मेघदूत, पूसा मंजरी और पूसा नवीन किस्में उपयुक्त हैं। तरबूज की अर्का मानिक, दुर्गापुर मधु, सुगरबेबी और अर्का ज्योति (संकर) तथा खरबूज की अर्का जीत, अर्का राजहंस और पूसा शर्बती किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित हैं। इसके अलावा नेनुआ की पूसा चिकनी और स्वर्ण प्रभा, तथा करेला की अर्का हरित, काशी उर्वशी, पूसा विशेष और कोयंबटूर लॉन्ग किस्मों की बुआई की जा सकती है। खेत की जुताई के समय 20-25 टन गोबर की खाद. 30 किलोग्राम नत्रजन, 50 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।
इन दिनों आम के बागों में मंजर पूरी तरह आ चुका है। इस अवस्था से लेकर फल के मटर के दाने के बराबर होने तक किसी भी प्रकार के कृषि रसायन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि कोई मंजर विकृत दिखाई दे तो उसे तोड़कर बगीचे से बाहर ले जाकर जला दें या जमीन में गाड़ दें, ताकि रोग या कीट का प्रसार न हो। इस समय बसंतकालीन गन्ना रोपण के लिए उपयुक्त समय है। यदि मार्च के अंतिम सप्ताह में खेत में नमी की कमी हो तो रोपाई से पहले हल्की सिंचाई कर लें। गन्ना रोपण के लिए दोमट मिट्टी तथा ऊँची जमीन का चयन करें और खेत की गहरी जुताई करें। अनुशंसित किस्मों के स्वस्थ बीज लें। बीज को रोपने से पहले कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल में 15-20 मिनट तक उपचारित करें। बीज रोगमुक्त होना चाहिए और जहाँ तक संभव हो 8-10 महीने पुरानी फसल को ही बीज के रूप में प्रयोग करें।
बैंगन की फसल में तना एवं फल छेदक कीट की निगरानी करें। इस कीट के लार्वा फल में घुसकर अंदर से उसे खा जाते हैं, जिससे फल की वृद्धि रुक जाती है और वह खाने योग्य नहीं रहता। इससे पूरी फसल को नुकसान हो सकता है। यदि कीट का प्रकोप दिखाई दे तो सबसे पहले संक्रमित तनों और फलों को तोड़कर नष्ट कर दें। इसके बाद मौसम साफ होने पर स्पिनोसैड 48 ईसी 1 मिली प्रति 4 लीटर पानी या क्विनालफॉस 1.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
दूध देने वाले पशुओं के रख-रखाव और उनके खान-पान पर विशेष ध्यान दें। दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्हें साफ दाना, हरा चारा और सूखा चारा मिलाकर खिलाएं। उनके आहार में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिज लवण शामिल होने चाहिए, ताकि पशु स्वस्थ रहे और दूध उत्पादन अच्छा हो सके।