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30-Nov-2020 10:45 AM
PATNA : बिहार में शराबबंदी कानून को लागू हुए भले ही 5 साल पूरे होने को है लेकिन राज्य के अंदर इस कानून की हकीकत सबको पता है. शराब की उपलब्धता और होम डिलीवरी सिस्टम को लेकर लगातार सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते रहते हैं. खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिनों चुनाव के दौरान शराबबंदी को लेकर जमीनी हकीकत से जुड़े कड़वे सवालों का सामना किया है, ऐसे में अब नीतीश हर कीमत पर शराबबंदी को कड़ाई से लागू करने की तैयारी में हैं. शराब बंदी लागू होने के बाद बिहार में माफिया ने जो समानांतर सिस्टम खड़ा किया उसे कैसे ध्वस्त किया जाए इसे लेकर कार्ययोजना बनाई जा रही है.
सरकार यह भली-भांति समझ रही है कि शराब माफिया के साथ मिलकर शासन और प्रशासन में बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ पुलिस कर्मियों ने किस कदर पैसा बनाया है. कैसे वह इस अवैध सिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं. कैसे माफिया के साथ मिलकर अवैध उगाही की जा रही है. इस सब पर नकेल कसने के लिए अब सरकार ने नजर टेढ़ी कर दी है.
शराबबंदी कानून को सफल बनाया जाए इसके लिए मुख्य सचिव ने सभी जिलों के डीएम एसपी को दिशा निर्देश जारी किया है. मुख्य सचिव की तरफ से सभी जिलों के डीएम और एसपी को एक पत्र भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि वैसे अधिकारियों, सरकारी सेवकों और पुलिसकर्मियों की पहचान की जाए. जिनके जिम्मे शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने का काम है और उसके बावजूद यह नहीं हो पा रहा. शराब के काले कारोबार में शामिल अफसरों, कर्मचारियों पर नकेल कसी जाए और इसके लिए खुफिया निगरानी की जाए.
बिहार में शराबबंदी के बाद जिस किसी ने इस अवैध कारोबार से अकूत संपत्ति बनाई है, जिसकी संपत्ति में इजाफा हुआ है. वैसे अधिकारी जो शराबबंदी रोकने के लिए जवाब दे हैं और उसके बावजूद उनके इलाके में शराबबंदी फेल नजर आ रही है. खासतौर पर ऐसे अधिकारी जिनकी संपत्ति लगातार बढ़ रही है, उस सब की खुफिया निगरानी करते हुए जिले के एसपी और डीएम इसकी रिपोर्ट ऊपर के अधिकारियों को देंगे. इस रिपोर्ट के आधार पर ऐसे पुलिसकर्मियों, अधिकारियों और कर्मचारियों पर सरकार एक्शन लेने की तैयारी में है. मुख्य सचिव दीपक कुमार ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय है. चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या फिर कर्मचारी. शराब बंदी कानून के खिलाफ जाने वाले अफसरों पर कार्रवाई करेगी. सरकार एक ऐसा सिस्टम खड़ा करने जा रही है जिसके तहत सरकारी अफसरों, कर्मचारियों और पुलिस पदाधिकारियों के साथ-साथ निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक के बारे में शिकायत मिलने पर उसकी सत्यता की जांच की जा सके और तत्काल एक्शन भी हो सके. यह भी तय किया जा रहा है कि बड़े से बड़ा अधिकारी अगर दोषी है तो वह इस मामले में बच नहीं पाए. दोषी अधिकारियों को निलंबित किए जाने से लेकर विभागीय कार्यवाही तक किए जाने की तैयारी है. सेंट्रल टीम गुप्त सूचना के आधार पर भी एक्शन लेगी.