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05-Oct-2022 01:56 PM
PATNA : निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद बिहार में सियासी संग्राम छिड़ गया है। इसको लेकर सत्ताधारी और विपक्षी दल आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ जहां जेडीयू इसे बीजेपी की साजिश बता रही है तो वहीं बीजेपी ने इसके लिए जेडीयू और आरजेडी को जिम्मेवार ठहराया है। विधान परिषद में विरोधी दल के नेता सम्राट चौधरी ने इसको लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार ने अति पिछड़ा समाज के लोगों को धोखा देने का काम किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कोर्ट की अवमानना का केस चलना चाहिए। उन्होंने कहा है कि बीजेपी सरकार से अति पिछड़ों के अपमान का बदला लेगी और इसके खिलाफ कल सभी जिला मुख्यालयों में नीतीश का पुतला फूंकेगी।
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में निकाय चुनाव को लेकर पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य में जो स्थितियां बनी हैं, उससे यह साफ हो गया है कि नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार के अति पिछड़ा समाज को धोखा दिया है। अति पिछड़ा समाज के जो उम्मीदवार निकाय चुनाव में उतरे हैं उनके साथ नीतीश कुमार ने आर्थिक और सामाजिक खिलवाड़ करने का काम किया है। नीतीश कुमार की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आयोग का गठन नहीं किया, जिसके कारण यह परिस्थिति उत्पन्न हुई है। बीजेपी ने निर्णय लिया है कि गुरुवार 6 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पुतला दहन के माध्यम से बीजेपी बिहार सरकार को सचेत करेगी। उन्होंने निकाय चुनाव पर रोक के लिए सीधे तौर पर नीतीश कुमार को जिम्मेवार ठहराया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के जिद्द के कारण बिहार में निकाय चुनाव नहीं हो सका। एनडीए की सरकार में पंचायती राज विभाग और नगर विकास विभाग ने सरकार को आयोग गठन करने का प्रस्ताव दिया था, एडवोकेट जनरल ने भी इसकी सहमति दी थी। लेकिन नीतीश कुमार की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की। नीतीश कुमार के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस चलना चाहिए, क्योंकि नीतीश कुमार ही एक मात्र व्यक्ति हैं जिन्होंने आयोग के गठन पर अपनी सहमति नहीं दी थी।
सम्राट चौधरी ने कहा है कि नीतीश कुमार ने राज्य निर्वाचन आयोग पर दबाव बनाकर निकाय चुनाव की घोषणा करवा दी। पटना हाई कोर्ट ने भी अपने जजमेंट में स्पष्ट तौर पर कहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र होकर काम करना चाहिए लेकिन नीतीश कुमार ने बिहार के अति पिछड़ों का अपमान करने का काम किया है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में जब ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वहां विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया। विशेष सत्र में सरकार ने यह संकल्प लिया कि वह आरक्षण देगी। जिसके बाद आयोग का गठन किया गया। आयोग की जांच रिपोर्ट आने के बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में चुनाव कराए गए।
बिहार में ऐसी क्या परिस्थित बन गई कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर निकाय चुनाव की घोषणा कर दी गई। क्या नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव अति पिछड़ा विरोधी हैं। पांच हजार से अधिक उम्मीदवार लाखों रुपया निकाय चुनाव के पीछे खर्च कर चुके हैं, उनके इस पैसे की भरपाई कौन करेगा। वहीं सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के निर्णय पर सम्राट चौधरी ने बिहार की सरकार को सलाह दिया है कि वह विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर उसमें अति पिछड़ा को आरक्षण देने का संकल्प ले और आयोग का गठन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट जाए।
वहीं तेजस्वी यादव द्वारा बीजेपी पर आरक्षण विरोधी होने का आरोप लगाने पर सम्राट चौधरी ने पटलवार किया है। उन्होंने कहा है कि नीतीश और लालू ने बिहार में 32 साल तक शासन चलाया। लालू यादव ये बता दें कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बिहार में किस वर्ग को आरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद ने जब पंचायत और निकाय चुनाव कराया था तब अति पिछड़ा की बात तो दूर दलित समाज के लोगों तक को भूल गए थे। उन्होने कहा कि बीजीपे नहीं बल्कि राष्ट्रीय जनता दर आरक्षण विरोधी है।