Bihar News : JDU-BJP के माननीयों ने ही मंत्री के पसीने छुड़ा दिए, शिक्षा विभाग में हो रही सरकारी आदेश की अनदेखी! अब नहीं सूझ रहा जवाब

बिहार विधान परिषद में शिक्षक प्रमोशन और नियुक्ति नियमावली 2012 को लेकर सरकार घिर गई। विपक्ष और सत्ता पक्ष के पार्षदों ने शिक्षा विभाग से जवाब मांगा।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 13 Feb 2026 12:36:08 PM IST

Bihar News : JDU-BJP के माननीयों ने ही मंत्री के पसीने छुड़ा दिए, शिक्षा विभाग में हो रही सरकारी आदेश की अनदेखी! अब नहीं सूझ रहा जवाब

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Bihar News :बिहार विधान परिषद में शिक्षा विभाग से जुड़े एक अहम मुद्दे पर जमकर बहस देखने को मिली, जब विधान पार्षद बंशीधर बृजवासी ने सरकार की शिक्षक नियुक्ति और प्रमोशन से जुड़ी नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उनके सवालों ने न केवल शिक्षा मंत्री को असहज कर दिया बल्कि विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर लिया।


बंशीधर बृजवासी ने अपने सवाल की शुरुआत वर्ष 2012 में राज्य सरकार द्वारा लाई गई नियमावली का हवाला देते हुए की। उन्होंने बताया कि 3 अप्रैल 2012 को लागू इस नियमावली की कंडिका 7 में स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को बेसिक ग्रेड शिक्षक, कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वालों को स्नातक ग्रेड शिक्षक तथा कक्षा 8 से 10 तक पढ़ाने वालों को हेडमास्टर ग्रेड शिक्षक माना जाएगा। साथ ही इस नियमावली में यह भी प्रावधान किया गया था कि दो वर्षों तक आधे पद प्रमोशन के माध्यम से तथा आधे पद सीधी भर्ती के जरिए भरे जाएंगे।


बृजवासी ने सवाल उठाया कि यह नियमावली केवल दो वर्षों के लिए बनाई गई थी, लेकिन आज 14 वर्ष बीत जाने के बावजूद इस पर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि जब सरकार यह कह रही है कि पद खाली ही नहीं हैं, तो फिर आधे पदों पर ही नियुक्ति की जानी थी, ऐसे में सभी पदों पर नियुक्ति कैसे कर दी गई। उन्होंने राज्य के लगभग 32 हजार मध्य विद्यालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि हर विद्यालय में सात विषयों के स्नातक ग्रेड शिक्षक होने चाहिए, तो लगभग 2 लाख 24 हजार पद सृजित होते हैं। उन्होंने पूछा कि इतने बड़े पैमाने पर स्नातक ग्रेड में नियुक्तियां कब और कैसे हुईं।


उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि हाई स्कूल के माध्यमिक शिक्षकों को उच्च माध्यमिक शिक्षक में प्रमोशन दिया जाना था और उच्च माध्यमिक शिक्षकों को प्रधानाध्यापक बनाया जाना था, लेकिन यह प्रक्रिया भी आज तक पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार पद नहीं होने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर विशिष्ट शिक्षक नियमावली के तहत आदेश जारी किए जा रहे हैं, जो विरोधाभासी स्थिति को दर्शाता है।


इस मुद्दे पर संजीव कुमार सिंह ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि नियोजित शिक्षक आज भी स्थानीय निकाय के शिक्षक हैं और उनके लिए प्रमोशन का स्पष्ट नियम है, फिर भी उन्हें प्रमोशन क्यों नहीं दिया जा रहा है। नवल किशोर यादव ने भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार ने नियमावली बनाई है, तो उसका पालन भी सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि नियमों में संशोधन की जरूरत है तो सरकार संशोधन कर सकती है, लेकिन नियमों की अनदेखी करना उचित नहीं है।


जीवन कुमार ने भी पुराने और अनुभवी शिक्षकों को प्रमोशन नहीं मिलने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को उनके अनुभव का लाभ मिलना चाहिए और उन्हें समय पर पदोन्नति दी जानी चाहिए।


इस पूरे मामले में सत्ता पक्ष के विधान पार्षद नीरज कुमार ने भी सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि सहायक शिक्षकों का ग्रेड पे लेवल-9 पर तय किया गया है और प्रमोशन के बाद उन्हें इंक्रीमेंट का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन यह लाभ भी उन्हें नहीं मिल रहा है। उन्होंने इसे सरकार की अधिसूचना की अवहेलना बताया।


इन सभी सवालों के जवाब में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि सरकार पंचायत व्यवस्था से आए शिक्षकों की अनदेखी करने की सोच भी नहीं सकती। उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा लेकर शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया है, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि जिन शिक्षकों को अब तक प्रमोशन नहीं मिला है, उनके प्रमोशन पर सरकार विचार करेगी और पूरे मामले की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।