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Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा में अनुश्रवण समिति को लेकर हंगामा, 5 साल से बैठक नहीं होने पर उठा सवाल; जानिए मंत्री ने क्या दिया जवाब

बिहार विधानसभा में अनुश्रवण समिति की बैठक नहीं होने को लेकर प्रश्नकाल के दौरान जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष ने 5 साल से समिति गठन नहीं होने का मुद्दा उठाया, मंत्री ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया।

Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा में अनुश्रवण समिति को लेकर हंगामा, 5 साल से बैठक नहीं होने पर उठा सवाल; जानिए मंत्री ने क्या दिया जवाब
Tejpratap
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Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा में आज अनुश्रवण समिति की बैठक नहीं होने को लेकर सदन में जोरदार गहमागहमी देखने को मिली। प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई। इस मामले को उठाते हुए विधायक अख्तरूल इमाम ने सरकार से सवाल किया कि अनुमंडल स्तर पर अनुश्रवण समिति के गठन का निर्णय सरकार द्वारा पहले ही लिया जा चुका था, लेकिन पिछले पांच वर्षों में इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।


अख्तरूल इमाम ने सदन में कहा कि अनुश्रवण समिति का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करना होता है ताकि आम जनता को योजनाओं का लाभ सही तरीके से मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुमंडल स्तर पर समिति का गठन नहीं होने के कारण कई योजनाओं की सही निगरानी नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि जब इस संबंध में एसडीओ से सवाल किया गया तो उन्होंने एक बार बैठक बुलाने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद समिति की कोई बैठक नहीं हुई और पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।


इस पर जवाब देते हुए विभागीय मंत्री ने कहा कि अगर इस तरह की समस्या पिछले पांच वर्षों से थी तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि अब जाकर विपक्ष की नींद टूटी है। हालांकि मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही सभी अनुमंडलों में अनुश्रवण समितियों का गठन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर निर्देश जारी किए जाएंगे ताकि समितियां नियमित रूप से काम कर सकें और उनकी बैठकें समय-समय पर आयोजित की जा सकें।


इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के विधायक प्रमोद कुमार ने भी सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि यह बात सही है कि कई स्थानों पर समितियां बनाई तो गई थीं, लेकिन वे प्रभावी रूप से काम नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि समितियों की निष्क्रियता के कारण प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ रही है, जिसे मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि समिति के गठन के साथ-साथ उसकी कार्यप्रणाली को भी प्रभावी बनाया जाए।


सदन में इस मुद्दे को लेकर कुछ समय तक शोर-शराबा और बहस जारी रही। विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत हो और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।


इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बिहार विधानसभा में माहौल काफी गर्म रहा। हालांकि बाद में सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई, लेकिन यह मुद्दा राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार अपने आश्वासन को कितनी जल्दी जमीन पर उतारती है और अनुमंडल स्तर पर अनुश्रवण समितियों का गठन कब तक पूरा किया जाता है।