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Bihar News: बिहार की कोर्ट ने DMK सांसद दयानिधि मारन को किया तलब, उत्तर भारतीय महिलाओं पर टिप्पणी का मामला

Bihar News: मुजफ्फरपुर कोर्ट ने DMK सांसद दयानिधि मारन को उत्तर भारतीय महिलाओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में 23 फरवरी 2026 को पेश होने का समन जारी किया है।

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दयानिधि मारन की मुश्किलें बढ़ीं
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: मुजफ्फरपुर जिले के कोर्ट में दर्ज परिवाद में द्रमुक (DMK) सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुजफ्फरपुर के अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (ACJM-1, पश्चिम) की अदालत ने उत्तर भारतीय महिलाओं पर कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में संज्ञान लेते हुए मारन को समन जारी किया है। सम्मन रजिस्टर्ड डाक से 13 फरवरी को भेजा गया है। अदालत ने उन्हें 23 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का कड़ा निर्देश दिया है।


क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद दयानिधि मारन द्वारा चेन्नई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए एक विवादास्पद बयान से उपजा है। आरोप है कि मारन ने हिंदी भाषी राज्यों और तमिलनाडु के बीच तुलना करते हुए कहा था कि उत्तर भारत की महिलाएं और लड़कियां केवल खाना बनाने और बच्चे पैदा करने तक सीमित हैं। इसके विपरीत, उन्होंने तमिलनाडु की महिलाओं को शिक्षित और प्रगतिशील बताया था। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देशभर में, विशेषकर उत्तर भारत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।


कानूनी कार्रवाई की मांग

इस मामले में स्थानीय अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने मुजफ्फरपुर की अदालत में एक परिवाद दायर किया था। ओझा ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि सांसद का बयान न केवल उत्तर भारतीय महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला है, बल्कि यह देश की एकता को प्रभावित कर क्षेत्रीय विद्वेष और नफरत फैलाने की एक सोची-समझी कोशिश है।


इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत संज्ञान लिया है। इनमें मुख्य रूप से: धारा 74, 75 और 79: (महिला की गरिमा और अपमान से संबंधित), धारा 192 और 298: (धार्मिक या क्षेत्रीय भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और धारा 352 और 251(2): (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) शामिल है।


अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने बताया कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को देश के किसी हिस्से या वर्ग का अपमान करने का अधिकार नहीं है। अब सबकी नजरें 23 फरवरी 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब दयानिधि मारन को अदालत के समक्ष अपनी सफाई पेश करनी होगी। 

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता