1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 13 Feb 2026 12:12:53 PM IST
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Bihar teacher leave : बिहार विधान परिषद में महिला शिक्षकों और कर्मियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के दौरान शिशु देखभाल अवकाश और मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन भुगतान का विषय प्रमुख रूप से उठा। सदन में इस विषय पर विभिन्न दलों के सदस्यों ने अपनी बात रखी और सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की।
चर्चा के दौरान संजय कुमार सिंह ने महिला शिक्षकों के लिए 730 दिनों का शिशु देखभाल अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि महिला शिक्षकों को परिवार और बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारियों के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें पर्याप्त अवकाश की सुविधा मिलनी चाहिए, जिससे वे अपने शिशु की सही तरीके से देखभाल कर सकें और साथ ही अपने कार्य दायित्वों को भी बेहतर ढंग से निभा सकें। उन्होंने यह भी बताया कि राज्यपाल सचिवालय की ओर से इस संबंध में अनुशंसा की जा चुकी है, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से अब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सदन में इस मुद्दे को लेकर कई सदस्यों ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। सदस्यों का कहना था कि महिला कर्मियों के हित में यह निर्णय अत्यंत आवश्यक है और इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए। इस पर जवाब देते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले 15 दिनों के भीतर इस मामले पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार महिला शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में सकारात्मक निर्णय लेने की दिशा में काम चल रहा है।
इसके अलावा सदन में मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन भुगतान का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। इस विषय को उठाते हुए डॉ. सुनील कुमार सिंह ने कहा कि पहले मातृत्व अवकाश के दौरान महिला शिक्षकों को वेतन भुगतान में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि पहले मातृत्व अवकाश समाप्त होने के बाद ही वेतन का भुगतान किया जाता था, जिससे महिला शिक्षकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की थी।
इस पर शिक्षा मंत्री ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने इस नियम में संशोधन कर दिया है। अब महिला शिक्षकों को मातृत्व अवकाश के दौरान हर महीने नियमित रूप से वेतन का भुगतान किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय महिला शिक्षकों की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि मातृत्व अवकाश के दौरान उन्हें किसी प्रकार की वित्तीय परेशानी का सामना न करना पड़े।
शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि मातृत्व अवकाश के साथ-साथ चिकित्सा अवकाश और अन्य देय भुगतानों को भी समय पर सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार महिला कर्मियों के कल्याण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि महिला शिक्षकों से जुड़े सभी लंबित मुद्दों पर चरणबद्ध तरीके से समाधान किया जाएगा।
सदन में इस आश्वासन के बाद कई सदस्यों ने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही शिशु देखभाल अवकाश से जुड़े प्रस्ताव पर भी सकारात्मक निर्णय लेगी। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इससे बड़ी संख्या में महिला शिक्षकों और कर्मियों को लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सुविधाएं महिलाओं को कार्य और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन बनाने में मदद करती हैं और इससे कार्यक्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ती है।कुल मिलाकर, सदन में उठाए गए इन मुद्दों को महिला शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है और अब सभी की नजर सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।