Civil defence distric mock drill: गृह मंत्रालय ने 7 मई को देशभर के 244 जिलों में पहली बार 1971 के बाद एक व्यापक सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित करने की घोषणा की है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा और आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों और संबंधित एजेंसियों की तत्काल प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है। 


 इस मॉक ड्रिल की तैयारियों को लेकर दिल्ली स्थित गृह मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें योजना के सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आइए जानें – क्या होता है सिविल डिफेंस और कैसे तय किए जाते हैं सिविल डिफेंस जिले? सिविल डिफेंस (Civil Defence) का अर्थ है आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों, संपत्तियों और बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए की जाने वाली संगठित, गैर-सैन्य (non-military) प्रयास होता है | 


सिविल डिफेंस का उद्देश्य:

जीवन की रक्षा करना – नागरिकों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित रखना।

नुकसान कम करना – संपत्ति और ढांचागत सुविधाओं का नुकसान कम करना।

सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना – आपदा के समय आवश्यक सेवाएं चालू रखना।

 तैयारी और जागरूकता बढ़ाना – आम जनता को आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित करना।


मुख्य कार्य:

राहत और बचाव कार्य

लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना (evacuation)

अस्थायी आश्रय (shelter) की व्यवस्था

आग बुझाना (firefighting)

प्राथमिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं

संचार व्यवस्था

मॉक ड्रिल और जन-जागरूकता अभियान


भारत में कौन करता है सिविल डिफेंस का संचालन?

भारत में सिविल डिफेंस का संचालन गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) करता है। यह राज्य और जिला स्तर पर स्वयंसेवकों (volunteers), होम गार्ड, NCC, और स्थानीय प्रशासन की मदद से कार्य करता है। 

जानिए सिविल डिफेंस जिलों की श्रेणीबद्धता कैसे होती है?

भारत सरकार ने 244 जिलों को सिविल डिफेंस जिलों के रूप में नामित किया है, जिनका चयन रणनीतिक महत्व, भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या घनत्व, और संवेदनशीलता के आधार पर किया गया है।  इन जिलों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: 

श्रेणी I: सीमा से लगे और उच्च संवेदनशीलता वाले जिले।

श्रेणी II: महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और औद्योगिक प्रतिष्ठानों वाले जिले।

श्रेणी III: अन्य जिले जहाँ नागरिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।  


बिहार के सिविल डिफेंस जिले

भारत सरकार द्वारा आयोजित सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल के लिए बिहार के निम्नलिखित जिलों का चयन किया गया है:

पटना,कठिहार ,बरौनी , पूर्णिया बेगूसराय ,इन जिलों में एयर रेड सायरन टेस्ट, ब्लैकआउट प्रक्रियाएं और निकासी अभ्यास जैसी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखा जा सके।


झारखंड के सिविल डिफेंस जिले

झारखंड में निम्न छह स्थानों को मॉक ड्रिल के लिए चुना गया है:

रांची, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, गोड्डा, साहेबगंज, गोमो में मॉक ड्रिल आम जनता को जागरूक करने और प्रशासन की तत्परता जांचने के लिए आयोजित की जा रही है।


मॉक ड्रिल में क्या होगा? 

7 मई को आयोजित मॉक ड्रिल में निम्नलिखित गतिविधियाँ शामिल होंगी: 

एयर रेड सायरन: हवाई हमले की चेतावनी के लिए सायरन बजाना।

ब्लैकआउट: शहरों में सभी लाइट्स बंद करना ताकि दुश्मन की निगाहों से बचा जा सके।

नागरिकों का प्रशिक्षण: छात्रों और आम जनता को आपातकालीन स्थितियों में सुरक्षित रहने के उपाय सिखाना।

आपातकालीन सेवाओं की जांच: पुलिस, फायर ब्रिगेड, और स्वास्थ्य सेवाओं की तत्परता की समीक्षा।  


 कौन-कौन भाग लेगा?

इस मॉक ड्रिल में निम्नलिखित प्रतिभागी शामिल होंगे: 

सिविल डिफेंस वॉर्डन और स्वयंसेवक

होम गार्ड्स  

राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC)

राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS)

नेहरू युवा केंद्र संगठन (NYKS)

पुलिस और जिला प्रशासन

विद्यालय और कॉलेज के छात्र शामिल हो सकते हैं |


 "शेल्टर-इन-प्लेस" प्रोटोकॉल क्या है?  

यह एक सुरक्षा उपाय है जिसमें नागरिकों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने घरों या सुरक्षित स्थानों में ही रहें, दरवाजे और खिड़कियाँ बंद रखें, और आपातकालीन सेवाओं के निर्देशों का पालन करें।  यह प्रोटोकॉल हवाई हमले या अन्य आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लागू किया जाता है। 


 इतिहास और पृष्ठभूमि

बता दे कि यह मॉक ड्रिल 1971 के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर आयोजित की जा रही है।  पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते सीमा पार तनाव और आतंकी हमलों की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने नागरिकों और प्रशासनिक तंत्र की तैयारियों की समीक्षा के लिए यह कदम उठाया है।