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22-Oct-2025 09:39 AM
By First Bihar
Bihar Assembly Elections 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 इस बार दो चरणों में हो रहे हैं, और हर चरण की अपनी अलग अहमियत है। लेकिन भाजपा के लिए पहला चरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस चरण में पार्टी के 11 मंत्रियों के साथ-साथ कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा और राजनीतिक भविष्य सीधे तौर पर चुनाव परिणामों से जुड़ा है।
पहले चरण में 6 नवम्बर को कुल 121 सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में चुनावी मैदान में भाजपा के दो उपमुख्यमंत्री – सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा – भी शामिल हैं। दोनों ही नेता अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। सम्राट चौधरी तारापुर से पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत है। उनके पिता और पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी इस सीट से छह बार जीत चुके हैं, जबकि उनकी मां पार्वती देवी एक बार चुनाव जीत चुकी हैं।
वहीं, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा लखीसराय से चुनाव लड़ रहे हैं। वह यहां से चार बार विधायक रह चुके हैं और उनका अनुभव इस बार भाजपा के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रामकृपाल यादव भी इस चरण में दानापुर से पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका चुनाव परिणाम भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस चरण में भाजपा के अन्य बड़े चेहरे भी मैदान में हैं। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय सीवान से चुनाव मैदान में हैं। यह उनके लिए खास चुनाव है क्योंकि वह पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन बांकीपुर से, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी दरभंगा से और नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री जिवेश मिश्र जाले से अपने निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।
कुर्धनी से पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, साहेबगंज से पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह, अमनौर से सूचना एवं प्रावैधिकी मंत्री कृष्ण कुमार मंटू, बिहारशरीफ से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री सुनील कुमार और बछवाड़ा से खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता भी अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी की प्रतिष्ठा बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले चरण के नतीजे न केवल भाजपा के मंत्रियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पूरे राज्य के चुनावी समीकरण को भी प्रभावित कर सकते हैं। अगर भाजपा अपने इन बड़े चेहरों के साथ अच्छी पकड़ बनाने में सफल रहती है, तो इसका फायदा दूसरे चरण के चुनावों में भी पार्टी को मिलेगा। वहीं, यदि इन सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ता है, तो यह उसके लिए राजनीतिक चुनौती भी बन सकता है।
मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक पहले चरण के नतीजों पर खास नजर रखे हुए हैं। इस चरण में चुनाव परिणाम आने के बाद कई बड़े नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा का आकलन किया जाएगा। ऐसे में पार्टी की रणनीति, प्रत्याशियों का प्रचार और जनता के रुझान सभी मिलकर तय करेंगे कि भाजपा पहले चरण में कितनी मजबूत स्थिति में है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और जनसमर्थन दोनों ही दृष्टिकोण से यह चरण बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा के लिए यह परीक्षा उनके नेताओं की व्यक्तिगत लोकप्रियता, पार्टी की नीतियों और जनसमूह के बीच उनकी पकड़ को परखने का अवसर भी है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण भाजपा के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। यहां न केवल मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है, बल्कि राज्य में पार्टी की रणनीति और भविष्य की दिशा भी इसी चरण के चुनाव नतीजों पर निर्भर करेगी।