गोपालगंज में दर्दनाक हादसा: तालाब में डूबने से दो स्कूली छात्रों की मौत मुजफ्फरपुर: केंद्रीय कारागार के विचाराधीन बंदी की SKMCH में मौत, गंभीर बीमारी और ड्रग एडिक्शन से था ग्रसित मुजफ्फरपुर कोर्ट का बड़ा फैसला: अपहरण और बाल विवाह मामले में मुकेश सहनी को 3 साल की सजा Bihar News: हड़ताली अंचल अधिकारियों पर बड़ा प्रहार...एक साथ कई CO को किया गया सस्पेंड, डिप्टी CM विजय सिन्हा का चला हथौड़ा WhatsApp कॉलिंग में बड़ा बदलाव: अब मिलेगी पूरी तरह शोर-मुक्त बातचीत की सुविधा, जानिए कैसे? बिहटा के NSMCH में CME का आयोजन: "BIHAR में हीमोग्लोबिनोपैथी निदान को सुदृढ़ बनाना स्क्रीनिंग से मॉलिक्यूलर टेस्टिंग तक” सवारी बिठाने के लिए टोटो चालकों के बीच जमकर मारपीट, चाकू से किया हमला Bihar News: रेस्टोरेंट की आड़ में चल रहा गंदा काम, पुलिस ने किया पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मस्जिद-कब्रिस्तान विवाद सुलझा, आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रास्ता हुआ साफ बिहार में तेज रफ्तार का कहर: हाईवा की टक्कर से बाइक सवार की मौके पर मौत, गुस्साए ग्रामीणों ने NH किया जाम
02-Jun-2025 03:32 PM
By First Bihar
Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शुमार किया जाता है। इस परीक्षा को पास करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि हर साल लाखों कैंडिडेट्स इसमें भाग लेते हैं, लेकिन सफल सिर्फ चंद लोग ही हो पाते हैं। ऐसे में आज हम आपको एक ऐसी प्रेरणादायक शख्सियत की कहानी बता रहे हैं जिन्होंने एक समय स्कूल की परीक्षा में असफलता पाई, लेकिन बाद में देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल कर एक मिसाल कायम की।
हम बात कर रहे हैं IAS रुक्मिणी रियार की, जो मूल रूप से चंडीगढ़ की रहने वाली हैं। उनके पिता बलजिंदर सिंह रियार, होशियारपुर के रिटायर्ड डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी रहे हैं और उनकी मां तकदीर कौर एक गृहिणी हैं। रुक्मिणी की पढ़ाई पंजाब के गुरदासपुर से शुरू हुई। शुरुआती दिनों में पढ़ाई में विशेष रूचि नहीं होने के कारण वह क्लास 6 में फेल हो गई थीं, लेकिन इस एक असफलता ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
रुक्मिणी ने बाद में शिक्षा को गंभीरता से लिया। उन्होंने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर से ग्रेजुएशन किया और फिर टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ (TISS), मुंबई से पोस्ट-ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की। टाटा इंस्टीट्यूट में पढ़ाई के दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर काम करने की गहरी समझ विकसित की। इसके बाद उन्होंने एक NGO में काम करना शुरू किया, जहां से उनके मन में जन सेवा की भावना प्रबल हुई और उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा देने का निश्चय किया। रुक्मिणी ने बिना किसी कोचिंग के पूरी तरह सेल्फ स्टडी के जरिए UPSC की तैयारी की। उन्होंने NCERT की किताबों के साथ-साथ प्रमुख अखबारों और मैगज़ीन से करंट अफेयर्स की तैयारी की। उनकी रणनीति में अनुशासन, निरंतरता और आत्मविश्वास का प्रमुख स्थान रहा।
साल 2011 में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर ली और देशभर में ऑल इंडिया रैंक 2 प्राप्त की। यह उपलब्धि उन सभी छात्रों के लिए एक प्रेरणा है जो सोचते हैं कि एक असफलता उनके करियर का अंत हो सकती है। रुक्मिणी ने सिद्ध कर दिया कि अगर इच्छाशक्ति, मेहनत और धैर्य हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। वर्तमान में रुक्मिणी एक वरिष्ठ IAS अधिकारी के रूप में सरकार के विभिन्न विभागों में जनसेवा कर रही हैं और अपनी कार्यशैली और समर्पण के लिए जानी जाती हैं। उनकी कहानी आज भी लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है। रुक्मिणी सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं और हमेशा निजता और सादगी में विश्वास रखती हैं। वे समय-समय पर युवाओं को UPSC की तैयारी संबंधी सुझाव भी देती हैं।