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20-May-2025 02:10 PM
By First Bihar
Bihar News: बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति जहां आज भी ग्रामीण भारत के लिए एक गंभीर समस्या बनी हुई है, वहीं बिहार के सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड की एक महिला ने इससे जुड़ी सोच को बदलने वाली मिसाल पेश की है। कटहरा पंचायत की एक सास अपने घर की नई बहू को शादी के महज एक हफ्ते बाद मध्य विद्यालय कटहरा में कक्षा 9 में नामांकन कराने खुद स्कूल लेकर पहुंची।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब शिक्षिका स्मिता ठाकुर ने इस दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में सास का शिक्षा के प्रति उत्साह और बहू को काबिल बनाने की सोच को लोगों ने खूब सराहा। शादी तो तय थी, पर अब पढ़ाई भी जरूरी है सास की सोच ने जीता दिल लिया है।
वीडियो में कहती हुए नजर आ रही है कि शादी तो एक दिन होनी ही थी, लेकिन मुझे लगा कि अब जब वह हमारे घर आई है, तो मेरी जिम्मेदारी है कि मैं उसे पढ़ाऊं। सास ने यह भी कहा कि उन्हें समाज से ताने भी मिलते हैं, लेकिन उन्होंने सभी आलोचनाओं को नजरअंदाज कर बहू की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। उनका सपना है कि उनकी बहू पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बने और भविष्य में बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाए।
हालांकि, इस कदम के बाद बाल विवाह की वैधता और नैतिकता पर बहस भी छिड़ गई है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या शादी के बाद स्कूल भेजना ही सही रास्ता है, जबकि कई लोग इसे एक साहसिक और सकारात्मक प्रयास मान रहे हैं।
सास ने स्पष्ट कहा कि, लड़की के माता-पिता आर्थिक रूप से असमर्थ थे और शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं थे। इसलिए मैंने ही उसकी जिम्मेदारी ली। वीडियो साझा करने वाली शिक्षिका स्मिता ठाकुर खुद लंबे समय से बाल विवाह रोकथाम और शिक्षा के प्रचार से जुड़ी मुहिम चला रही हैं। उन्होंने पंचायत के सरपंच को भी पत्र लिखकर इस कार्य में सहयोग की अपील की है।
वे पंचायत में घर-घर जाकर बाल विवाह के हानिकारक प्रभाव और शिक्षा के लाभों के बारे में लोगों को जागरूक कर रही हैं। यह मामला दर्शाता है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, यदि सोच सकारात्मक हो तो बदलाव मुमकिन है। यह सास न केवल अपनी बहू की शिक्षा की राह आसान कर रही है, बल्कि समाज के लिए एक नई प्रेरणा भी बन रही है।