बिहार में शराबबंदी कानून का माखौल उड़ा रही खाकी, दारोगा का शराब के साथ वीडियो वायरल; जांच के आदेश बिहार में शराबबंदी कानून का माखौल उड़ा रही खाकी, दारोगा का शराब के साथ वीडियो वायरल; जांच के आदेश निशांत को ही सीएम बनाना होता तो BJP नीतीश को जबरदस्ती राज्यसभा क्यों भेजती? JDU कार्यकर्ताओं की मांग पर बोले मुकेश सहनी निशांत को ही सीएम बनाना होता तो BJP नीतीश को जबरदस्ती राज्यसभा क्यों भेजती? JDU कार्यकर्ताओं की मांग पर बोले मुकेश सहनी मेला दिखाने के बहाने युवती से दुष्कर्म, रेप के बाद बॉयफ्रेंड ने लड़की को दोस्तों के सामने परोसा, विरोध करने पर मार डाला मेला दिखाने के बहाने युवती से दुष्कर्म, रेप के बाद बॉयफ्रेंड ने लड़की को दोस्तों के सामने परोसा, विरोध करने पर मार डाला बिहार में बिना जुताई अब आलू की खेती: जीरो टिलेज पर सरकार का फोकस, जल्द लागू होगी नई तकनीक बिहार में बिना जुताई अब आलू की खेती: जीरो टिलेज पर सरकार का फोकस, जल्द लागू होगी नई तकनीक बिहार में अब सरकारी टेंडरों पर रहेगी EOU की पैनी नजर, 5 सदस्यीय टीम गठित; गड़बड़ी करने वालों का खेल खत्म बिहार में अब सरकारी टेंडरों पर रहेगी EOU की पैनी नजर, 5 सदस्यीय टीम गठित; गड़बड़ी करने वालों का खेल खत्म
25-Jan-2026 10:38 AM
By First Bihar
Toll Tax New Rules : राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए सरकार ने एक बड़ी राहत भरी घोषणा की है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने टोल टैक्स से जुड़े नियमों में अहम संशोधन करते हुए निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल दरों में भारी कटौती का फैसला लिया है। नए नियमों के तहत दो-लेन (पेव्ड शोल्डर सहित) राष्ट्रीय राजमार्गों को चार-लेन या उससे अधिक चौड़ा किए जाने की स्थिति में यात्रियों को टोल टैक्स में 70 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। यानी निर्माण कार्य के दौरान सड़क उपयोगकर्ताओं को टोल की तय दर का केवल 30 प्रतिशत ही भुगतान करना होगा।
मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में यह संशोधन किया गया है, जिसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यह नियम नए साल से प्रभावी हो चुका है और देशभर में चल रही तथा भविष्य में शुरू होने वाली सभी ऐसी परियोजनाओं पर लागू होगा, जहां दो-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग को चार-लेन या उससे अधिक चौड़ा किया जा रहा है।
निर्माण कार्य के दौरान यात्रियों को राहत
अब तक अक्सर यह शिकायत सामने आती थी कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान यात्रियों को खराब सड़कों, डायवर्जन और ट्रैफिक जाम जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, बावजूद इसके उनसे पूरा टोल वसूला जाता था। नए नियम का उद्देश्य इसी असुविधा को देखते हुए यात्रियों को राहत देना है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जिस दिन से निर्माण कार्य शुरू होगा, उसी दिन से लेकर परियोजना पूरी होने तक यात्रियों से केवल 30 प्रतिशत टोल ही लिया जाएगा। इससे रोजाना सफर करने वाले स्थानीय यात्रियों और लंबी दूरी के वाहन चालकों, दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।
चार से छह और आठ लेन पर भी छूट
सरकार ने केवल दो-लेन से चार-लेन निर्माण तक ही सीमित नहीं रखा है। नए नियमों के तहत यदि किसी राजमार्ग को चार-लेन से छह या आठ लेन में अपग्रेड किया जा रहा है, तो उस अवधि में टोल टैक्स में 25 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसका मतलब है कि यात्रियों को तय टोल दर का केवल 75 प्रतिशत ही देना होगा। इसके अलावा पहले से लागू नियम के अनुसार, जब किसी टोल रोड की परियोजना लागत पूरी तरह वसूल हो जाती है, तब टोल टैक्स सिर्फ 40 प्रतिशत ही लिया जाता है।
हर साल बढ़ती टोल दरों से राहत
गौरतलब है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) हर साल टोल दरों में औसतन 7 से 10 प्रतिशत की वृद्धि करता है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान मिलने वाली यह छूट यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी, खासकर उन मार्गों पर जहां चौड़ीकरण का काम लंबे समय तक चलता है।
बड़े पैमाने पर हो रहा निवेश
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में लगभग 25 से 30 हजार किलोमीटर दो-लेन राष्ट्रीय राजमार्गों को चार-लेन में अपग्रेड किया जाना है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत करीब 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इसका मकसद सड़क नेटवर्क को मजबूत करना, यात्रा समय कम करना और माल ढुलाई को अधिक कुशल बनाना है।
माल ढुलाई और रफ्तार बढ़ाने पर जोर
एक अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर माल ढुलाई का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। चार-लेन और उससे अधिक चौड़े कॉरिडोर बनने से व्यावसायिक वाहनों की औसत रफ्तार 30–35 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 50 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक हो जाएगी। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आएगी।कुल मिलाकर, टोल टैक्स नियमों में किया गया यह संशोधन आम यात्रियों और परिवहन क्षेत्र दोनों के लिए राहत और सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।