1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 25 Jan 2026 12:31:01 PM IST
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Bihar education news : बिहार के मुजफ्फरपुर में शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाले दो शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। महिला शिक्षकों को व्हाट्सएप पर अश्लील मैसेज भेजने और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप में जांच के बाद दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। डीईओ अरविंद कुमार सिन्हा के निर्देश पर डीपीओ स्थापना इन्द्र कुमार कर्ण ने यह कार्रवाई की है और विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
कुढ़नी और मड़वन के दो स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के खिलाफ महिला शिक्षकों ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने मामले की जांच कराई और दोनों शिक्षकों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया। डीईओ ने बताया कि स्पष्टीकरण स्वीकार्य नहीं था। जांच में यह तथ्य सामने आया कि दोनों शिक्षक महिला शिक्षिकाओं से व्हाट्सएप पर अश्लील चैटिंग करते थे।
पहला मामला सकरा का है, जहां की एक महिला शिक्षिका ने कुढ़नी के विद्यालय अध्यापक दीपक कुमार के खिलाफ शिकायत की थी। दीपक कुमार पहले सकरा में ही कार्यरत थे। माध्यमिक डीपीओ से जांच कराई गई, जिसमें अश्लील चैटिंग का मामला सही पाया गया। इसके बाद दीपक कुमार को निलंबित कर दिया गया। वह उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय में तैनात थे।
दूसरा मामला मड़वन का है। यहां के प्राथमिक विद्यालय के पंचायत शिक्षक संतोष कुमार दास पर एक महिला शिक्षक ने आरोप लगाया कि उन्हें अश्लील मैसेज भेजे जा रहे हैं। विरोध करने पर शिक्षक ने उन्हें प्रताड़ित करने और धमकी देने की भी बात कही। इस मामले में पंचायत सचिव राज महमदपुर को निलंबन की अनुशंसा भेजी गई है।
यह मामला अकेला नहीं है। पिछले चार महीनों में मुजफ्फरपुर जिले में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। दो दर्जन से अधिक महिला शिक्षिकाओं ने इस तरह के शोषण के खिलाफ गुहार लगाई है। कई महिलाओं ने लिखित आवेदन देने से इनकार किया क्योंकि उन्हें धमकी दी जा रही थी। पारू के तीन मामले भी जांचाधीन हैं।
डीईओ अरविंद कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कहा है कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर सीधे निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। शिक्षकों द्वारा महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना स्वीकार्य नहीं है और शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वालों के खिलाफ विभाग सख्ती से आगे बढ़ रहा है।इस कड़ी कार्रवाई से यह संदेश गया है कि शिक्षा विभाग महिला शिक्षिकाओं के साथ हो रहे शोषण और दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेगा और दोषियों को किसी भी हालत में नहीं छोड़ा जाएगा।