1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 12, 2026, 10:26:36 AM
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Bihar News: बिहार को जल्द ही नया राज्यपाल मिलने जा रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन 14 मार्च को बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। राजभवन (लोकभवन) में आयोजित होने वाले एक औपचारिक समारोह में पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इस अवसर पर राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी, न्यायपालिका के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे।
नवनियुक्त राज्यपाल ले. जनरल सैयद अता हसनैन गुरुवार, 12 मार्च को पटना पहुंचेंगे। जानकारी के अनुसार वह दोपहर लगभग एक बजे पटना एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद वे सीधे लोकभवन जाएंगे, जहां उनके स्वागत की तैयारियां पहले से ही की जा रही हैं। राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से उनके स्वागत और शपथ ग्रहण समारोह को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
ले. जनरल सैयद अता हसनैन वर्तमान राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का स्थान लेंगे। आरिफ मोहम्मद खान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब राज्य की जिम्मेदारी ले. जनरल हसनैन संभालेंगे। बिहार के प्रशासनिक और संवैधानिक प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने सैन्य जीवन में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और देश की सेवा में अहम योगदान दिया है। सेना में रहते हुए उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नेतृत्व किया और अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया।
सैन्य सेवा के दौरान वे श्रीनगर स्थित चिनार कोर के कमांडिंग इन चीफ भी रह चुके हैं। चिनार कोर भारतीय सेना की एक महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है, जो जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस पद पर रहते हुए उन्होंने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
इसके अलावा ले. जनरल हसनैन शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दे चुके हैं। वर्ष 2018 में उन्हें कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था। कुलपति के रूप में उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए कई पहल कीं। उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।
अपने सैन्य करियर के दौरान ले. जनरल हसनैन ने कई महत्वपूर्ण अभियानों में भी भाग लिया है। वर्ष 1988 से 1990 के बीच उन्होंने श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के तहत चलाए गए ऑपरेशन पवन में हिस्सा लिया था। यह अभियान उस समय भारतीय सेना के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन माना जाता था।
इसके बाद वर्ष 1990-91 के दौरान उन्होंने पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उस समय पंजाब आतंकवाद की गंभीर समस्या से जूझ रहा था और सेना तथा सुरक्षा बलों ने मिलकर हालात को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन अभियानों में उनकी भागीदारी उनके साहस और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है।
अब बिहार के नए राज्यपाल के रूप में ले. जनरल सैयद अता हसनैन से यह उम्मीद की जा रही है कि वे अपने अनुभव और प्रशासनिक समझ के साथ राज्य के संवैधानिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाएंगे। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वय बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण होगी।
14 मार्च को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही बिहार को अपना नया संवैधानिक प्रमुख मिल जाएगा। राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बदलाव को लेकर काफी चर्चा भी हो रही है।