1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jan 25, 2026, 1:17:18 PM
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Tejashwi Yadav : बिहार की सियासत में रविवार 25 जनवरी का दिन ऐतिहासिक बन गया। पटना में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में पार्टी के नेता प्रतिपक्ष और बिहार के प्रभावशाली युवा नेता तेजस्वी प्रसाद यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। इस बैठक में आरजेडी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी मौजूद रहे।
राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक को पार्टी की तरफ से खास महत्व दिया गया था। बैठक में राष्ट्रीय नेतृत्व ने तेजस्वी यादव को पार्टी की कमान सौंपने की तैयारी कर ली थी। इसी क्रम में पार्टी के अंदरूनी रणनीतिक निर्णय के तहत तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का ऐलान किया गया।
कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी की जिम्मेदारी बढ़ी
तेजस्वी यादव के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद अब उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव और राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में तेजस्वी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी युवा और नए विचारों के साथ आगे बढ़ेगी। तेजस्वी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने से पार्टी में नई ऊर्जा का संचार होगा और संगठन में एक नई पहचान बनेगी।
लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी से बढ़ी बैठक की अहमियत
इस बैठक में लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी ने इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। लालू प्रसाद यादव ने भी तेजस्वी के नेतृत्व को लेकर समर्थन जताया और पार्टी के भविष्य को लेकर अपनी राय रखी। पार्टी के भीतर यह संकेत भी माना जा रहा है कि लालू परिवार के अंदरूनी सहयोग और समर्थन से तेजस्वी यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजद में तेजस्वी यादव का कार्यकारी अध्यक्ष बनना सिर्फ पार्टी का संगठनात्मक निर्णय नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी है। पिछले कई वर्षों से राजद की अगुवाई में लालू परिवार का प्रभाव रहा है। लेकिन अब तेजस्वी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के भविष्य में युवा नेतृत्व का रोल और अधिक स्पष्ट हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी के नेतृत्व में राजद की नीतियों में बदलाव और संगठनात्मक विस्तार देखने को मिल सकता है। साथ ही पार्टी के पुराने और नए कार्यकर्ताओं को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास तेजस्वी की प्राथमिकता में होगा।
तेजस्वी को अब कई चुनौतियों का सामना करना होगा। बिहार में सरकार विरोधी और सरकार समर्थक दलों के बीच कड़ी टक्कर है। ऐसे में राजद को अपने जनाधार को मजबूत करना होगा और जनता के मुद्दों को अपने एजेंडे में प्रमुखता से रखना होगा। कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में तेजस्वी यादव को पार्टी की रणनीति, संगठन, चुनावी तैयारी और गठबंधन जैसी जिम्मेदारियों को संभालना होगा। साथ ही उन्हें विपक्षी भूमिका में राज्य सरकार की नीतियों पर आलोचना करते हुए अपने पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत करना होगा।
बिहार की राजनीति में आज का दिन तेजस्वी यादव और आरजेडी के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। तेजस्वी का कार्यकारी अध्यक्ष बनना पार्टी में नए युग की शुरुआत है। अब देखना यह होगा कि तेजस्वी अपने नेतृत्व में राजद को किस दिशा में लेकर जाते हैं और आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में पार्टी किस तरह से अपनी भूमिका निभाती है।