25 से 29 मार्च तक पटना में सबसे बड़ी चेस रेटिंग प्रतियोगिता, रूस-जिंबाब्वे और नेपाल के दिग्गज खिलाड़ी हो रहे शामिल भतीजे ने पैर छुकर आशीर्वाद लिया तो नरम हो गये पशुपति पारस, कहा..खून का रिश्ता कभी समाप्त नहीं हो सकता बिहार में अपराधियों का तांडव जारी, पूर्व मंत्री के करीबी की गोली मारकर हत्या, रोते हुए BJP नेता ने की कार्रवाई की मांग बेगूसराय में 12 घंटे में तीसरी वारदात, नाबालिग छात्र आयुष की गोली मारकर हत्या दो सगे भाइयों से शादी रचाने वाली महिला प्रेग्नेंट, घर में आने वाला है नया मेहमान बिहटा में पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी कार्यशाला का सफल आयोजन, ग्रोथ हार्मोन थेरेपी पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी बेलगाम स्कॉर्पियो ने 2 युवतियों को रौंदा, मौत से गुस्साए लोगों ने किया सड़क जाम हंगामा बिहार बोर्ड इंटर परीक्षा में गोल संस्थान का शानदार प्रदर्शन, कई छात्रों ने 90% से अधिक अंक हासिल किए, कोचिंग के छात्रों ने मनाया सफलता का उत्सव बिहार में नहीं थम रहा भूमि विवाद का मामला, सासाराम में जमीन के लिए हत्या बिहार दिवस 2026: डॉ. एन. विजयलक्ष्मी की भरतनाट्यम प्रस्तुति ने बांधा समां, शक्ति आराधना और देशभक्ति का अद्भुत संगम
30-Jan-2025 04:58 PM
By First Bihar
patna: एनएच से संबंधित परियोजनाओं के निष्पादन को लेकर भू-अर्जन की कार्रवाई में देरी होने और टाल-मटोल रवैय्या अपनाए जाने को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त को पत्र लिखा है। कहा है कि इससे परियोजनाओं के पूरा होने में अनावश्यक विलंब हो रहा है।
भू-अर्जन की कार्रवाई के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित परियोजनाओं के निष्पादन के संबंध में अधिकारियों द्वारा निर्णय लेने की जगह टाल-मटोल का रास्ता अपनाया जा रहा है। इससे परियोजनाओं के पूरा होने में अनावश्यक विलंब हो रहा है और मुकदमेबाजी की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल रहा है। रैयतों एवं राज्य के व्यापक हित में इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की आवश्यकता है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव ने इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्त को पत्र लिखा है। पत्र में अर्जनाधीन भूमि की प्रकृति एवं दर को लेकर सक्षम प्राधिकार, भू-अर्जन द्वारा निर्णय लेने की जगह कार्रवाई को टालने का जिक्र किया गया है।
इसमें सभी प्रमंडलीय आयुक्त से अनुरोध किया गया है कि विवादित मामलों में जिनमें उनसे मध्यस्थ के रूप में निर्णय लेने की अपेक्षा की जाती है। इसमें एनएच एक्ट, 1956 एवं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्गत दिशा-निदेशों का पालन हो रहा है या नहीं इसका अवलोकन कर लें।
अर्जनाधीन भूमि की प्रकृति एवं दर को लेकर रैयतों में अक्सर असंतोष रहता है। खासकर भूमि की प्रकृति को लेकर क्योंकि प्रकृति से भूमि की दर का निर्धारण होता है और यह मुआवजा को निर्धारित करता है। इस संबंध में जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों के द्वारा लिए गए निर्णयों के खिलाफ आयुक्त सह अध्यक्ष याानि आर्बिट्रेटर के समक्ष अपील किए जाने का प्रावधान है।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित परियोजनाओं का निष्पादन एन0एच0 एक्ट 1956 की धारा 3 (G) के साथ भू अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 26 से 30 तक में वर्णित प्रावधान के अनुरूप काम किया जाए। धारा 26 से 30 के मुताबिक अधिसूचना की तिथि को लागू एमवीआर, जमीन की दर और सांत्वना राशि का निर्धारण किया जाता है।