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जानिये कौन है प्रमोद निषाद?..जिसने 19 हजार फर्जी आधार कार्ड का पूरा नेटवर्क खड़ा कर दिया

19 हजार फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड प्रमोद निषाद को गिरफ्तार किया गया। जनसेवा केंद्र की आड़ में आधार अपडेट और फर्जी पहचान बनाने का बड़ा नेटवर्क इसने खड़ा कर रखा था।

UP
डिजिटल फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड प्रमोद निषाद
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

DESK: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में STF ने गिरोह के मास्टरमाइंड प्रमोद कुमार निषाद को गिरफ्तार किया है, जिसने अब तक 18 से 19 हजार आधार कार्ड बनवाने और अपडेट कराने का खेल रचा था।


यूपी STF की माने तो 28 वर्षीय प्रमोद निषाद बहराइच जिले का रहने वाला है। आरोपी के पास से 2 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 2 एटीएम कार्ड, 1 चेकबुक, 1 आधार कार्ड, बायोमैट्रिक स्कैनर, रेटिना स्कैनर, वेबकैम, 87 मोबाइल स्क्रीनशॉट, एक कार और 2,680 रुपये नकद समेत कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं।


बहराइच-नेपाल बॉर्डर पर सक्रिय था गिरोह

उत्तर प्रदेश STF की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बहराइच-नेपाल सीमा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय था। आरोपी पोर्टल के जरिए कूटरचित जन्म और निवास प्रमाण पत्र तैयार करता था, जिनके आधार पर फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाए और अपडेट किए जाते थे। प्रमोद पढ़ा-लिखा था और उसने जनसेवा केंद्र की आड़ में हजारों लोगों की पहचान बदलने का खतरनाक खेल खेला।


जनसेवा केंद्र से अपराध की दुनिया तक का सफर

प्रमोद निषाद मूल रूप से बहराइच जिले के थाना मुर्तिहा क्षेत्र स्थित ग्राम सेमरी मलमला का निवासी है। उसने बीएससी तक पढ़ाई की है। वर्ष 2021 में उसने जनसेवा केंद्र पर ऑनलाइन आवेदन का काम सीखा और बाद में लाइसेंस लेकर “निषाद कंप्यूटर केंद्र” के नाम से जनसेवा केंद्र खोल लिया।


टेलीग्राम से जुड़ा अपराध नेटवर्क

सरकारी पोर्टलों की जानकारी के दौरान प्रमोद को डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों का अंदाजा हो गया। 2024 के अंत में टेलीग्राम के माध्यम से अकील सैफी नामक व्यक्ति से संपर्क हुआ, जिसने उसे फर्जी जन्म-निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले पोर्टल और आधार नामांकन की यूजर आईडी-पासवर्ड उपलब्ध कराए। इसके बदले 35 हजार रुपये की डील तय हुई।


बच्चों तक के फर्जी आधार बनाए

आईडी मिलने के बाद प्रमोद ने अपने सिस्टम में फर्जी सॉफ्टवेयर और टूल इंस्टॉल कर लिए। वह 1–2 मिनट में कूटरचित डिजिटल प्रमाण पत्र तैयार कर लेता था, जिनके आधार पर नए आधार कार्ड बनाए जाते या पुराने आधार में नाम, जन्मतिथि और पता बदला जाता था। चौंकाने वाली बात यह है कि 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के भी फर्जी आधार कार्ड बनाए गए।


हर आईडी पर करता था हजारों की कमाई

प्रमोद ने दर्जनों लोगों को AnyDesk के जरिए सिस्टम एक्सेस दे रखा था। हर यूजर आईडी के बदले वह 45,000 रुपये वसूलता था, जिसमें से 35,000 रुपये अकील सैफी को देता और बाकी रकम खुद रखता था। एक आईडी से रोजाना 20–25 आधार कार्ड बनाए या अपडेट किए जाते थे।


नेपाल भागने की फिराक में था आरोपी

पूछताछ में प्रमोद ने स्वीकार किया कि उसके नेटवर्क से 18–19 हजार फर्जी आधार कार्ड बनाए या संशोधित किए गए हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहा था और नेपाल फरार होने की तैयारी में था। STF को पुख्ता सूचना मिलने पर 12 दिसंबर की सुबह करीब 4:30 बजे उसे रजनवा नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल STF आरोपी से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

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रिपोर्टर / लेखक

Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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