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बिहार में एक ही ट्रैक पर आ गईं चार ट्रेनें, हलक में अटकी यात्रियों की जान; जानिए.. फिर क्या हुआ?

Bihar News: समस्तीपुर-बरौनी रेलखंड पर एक ही ट्रैक पर चार ट्रेनें खड़ी होने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। रेलवे ने स्पष्ट किया कि यह एंटी ब्लॉक सिग्नल प्रणाली के तहत सुरक्षित तकनीकी प्रक्रिया थी।

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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार के समस्तीपुर जिले में शुक्रवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक ही रेल ट्रैक पर चार ट्रेनें एक के पीछे एक खड़ी नजर आईं। यात्रियों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, वे हाल के दिनों में देश में हुए रेल हादसों को याद कर घबरा गए और किसी बड़े हादसे की आशंका जताने लगे। हालांकि, रेलवे अधिकारियों ने बाद में स्थिति को पूरी तरह सुरक्षित और तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा बताया।


यह मामला समस्तीपुर-बरौनी रेलखंड के अटेरन चौक रेलवे गुमटी संख्या 50B के पास का है। शुक्रवार की शाम एक मालगाड़ी इस ट्रैक से गुजर रही थी। उसके ठीक पीछे धुरियान एक्सप्रेस आकर रुक गई। इसके बाद कुछ ही देर में अवध एक्सप्रेस, राउरकेला-जयनगर एक्सप्रेस और क्लोन एक्सप्रेस भी उसी ट्रैक पर एक-दूसरे के पीछे खड़ी हो गईं।


चारों ट्रेनें अटेरन चौक रेलवे गुमटी 50B से कोरबद्धा 50C रेल गुमटी के बीच खड़ी रहीं। एक साथ कई ट्रेनों को रुका देख स्थानीय लोग और यात्री स्थिति को समझ नहीं पाए, जिससे मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।


इस पूरे मामले पर रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एंटी ब्लॉक सिग्नल (ABS) प्रणाली के तहत की गई सामान्य प्रक्रिया है। समस्तीपुर स्टेशन अधीक्षक नीलेश कुमार ने बताया कि मालगाड़ी के स्टेशन पहुंचने और लाइन खाली होने तक पीछे आ रही ट्रेनों को तय सुरक्षित दूरी पर रोका गया था।


नीलेश कुमार ने कहा कि यह प्रक्रिया एबीएस प्रणाली के तहत ट्रेन संचालन का सामान्य हिस्सा है। इसमें यात्रियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह व्यवस्था ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए की जाती है। उन्होंने आगे बताया कि एंटी ब्लॉक सिग्नल प्रणाली की मदद से एक ही ट्रैक पर कई ट्रेनों का संचालन पूरी तरह सुरक्षित होता है। इस सिस्टम से पीछे चल रही ट्रेन के लोको पायलट को आगे की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिलती रहती है।


रेलवे अधिकारियों के अनुसार, एबीएस तकनीक रेलवे की सुरक्षा और परिचालन क्षमता बढ़ाने वाली आधुनिक प्रणाली है। इसके उपयोग से ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित होता है और अधिक ट्रैफिक के बावजूद दुर्घटनाओं की आशंका नहीं रहती।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता

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