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21-Jan-2026 07:22 AM
By FIRST BIHAR
Population Census 2027: पटना जिले में जनगणना 2027 को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी सह प्रधान जनगणना अधिकारी के निर्देश पर जिला जनगणना कोषांग और जनगणना समन्वय समिति का गठन कर दिया गया है। यह जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी, जिसमें पहले चरण में अप्रैल से सितंबर 2026 तक मकानों की गणना और दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या की गणना की जाएगी। यह देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप और सेंसस मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएमएस) पोर्टल का उपयोग किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने मंगलवार को जनगणना कोषांग एवं जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (डीएलसीसीसी) का गठन कर तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसके तहत सभी प्रखंड, अनुमंडल, नगर निगम, नगर परिषद और अन्य स्थानीय निकायों से संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों के नाम, पद और मोबाइल नंबर तीन दिनों के भीतर मांगे गए हैं, ताकि यह जानकारी जनगणना निदेशालय और महारजिस्ट्रार कार्यालय को भेजी जा सके। स्वतंत्रता के बाद यह आठवीं और वर्तमान सहस्राब्दी की तीसरी जनगणना होगी, जिसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 निर्धारित की गई है।
जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने जिला जनगणना कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी सह जिला जनगणना पदाधिकारी की जिम्मेदारी उपविकास आयुक्त श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर को सौंपी है। वहीं अपर जिला जनगणना पदाधिकारी सह जिला योजना पदाधिकारी विदुर भारती को कोषांग का नोडल बनाया गया है। कोषांग में सात अन्य सदस्य भी होंगे, जो विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर जनगणना कार्य के क्रियान्वयन में सहयोग करेंगे। यह कोषांग जिला विकास भवन के प्रथम तल पर जिला योजना कार्यालय के सामने स्थापित किया गया है।
जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति के अध्यक्ष स्वयं जिलाधिकारी होंगे, जबकि संयोजक की जिम्मेदारी जिला योजना पदाधिकारी विदुर भारती को दी गई है। समिति में उपविकास आयुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी और जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी सदस्य के रूप में शामिल हैं। यह समिति जनगणना से जुड़े सभी कार्यों में मार्गदर्शन, समन्वय और प्रगति की निगरानी करेगी।
जिला प्रशासन ने नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के चार्ज जनगणना अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित प्रपत्र में पदधारी जनगणना अधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं। नगर निगम क्षेत्र में नगर आयुक्त या अपर नगर आयुक्त को जनगणना अधिकारी बनाया गया है, जबकि नगर परिषद, नगर पंचायत, अधिसूचित क्षेत्र समिति और छावनी परिषद के लिए अलग-अलग जनगणना अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में जनगणना कार्य के लिए उत्तरदायी होंगे।
प्रशिक्षण व्यवस्था के तहत जिलास्तर पर नामित अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर अनुमंडल, प्रखंड और फील्ड स्तर के कर्मियों को प्रशिक्षण देंगे, ताकि जमीनी स्तर पर जनगणना कार्य में किसी प्रकार की त्रुटि न हो।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जनगणना एक राष्ट्रीय दायित्व है, जिसे समयबद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित ढंग से पूरा करना अनिवार्य है। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत जनगणना कार्य में सहयोग करना कानूनी रूप से बाध्यकारी है। इसमें असहयोग या बाधा डालने पर 1000 रुपये तक का जुर्माना या तीन वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
जनगणना 2027 के पहले चरण में 1 अप्रैल से सितंबर 2026 तक मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनसंख्या की गणना होगी। इस दौरान प्रगणक घर-घर जाकर परिवार अनुसूची में निर्धारित विवरण दर्ज करेंगे। इसके बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक पुनरीक्षण दौरा होगा, जिसमें जन्म, मृत्यु या स्थानांतरण से जुड़े बदलाव दर्ज किए जाएंगे। पहली मार्च 2027 को संदर्भ तिथि माना जाएगा।
पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी। आंकड़ों का संग्रह मोबाइल ऐप के जरिए होगा और सभी चरणों की निगरानी के लिए सीएमएमएस पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। इससे पहले सारण के सोनपुर, नवादा के रजौली और सीतामढ़ी के डुमरा में किए गए पायलट अध्ययन में यह प्रणाली सफल रही है, जहां सभी प्रगणकों ने मोबाइल मोड से ही आंकड़े दर्ज किए थे।