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BIHAR NEWS: बिहार में VIP नंबरों की होड़! दो महीने में 5.95 करोड़ की कमाई, पटना सबसे आगे

बिहार में गाड़ियों के वीआईपी और आकर्षक नंबरों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। पिछले दो महीनों में ई-नीलामी के जरिए सरकार ने करीब 5.95 करोड़ रुपये की कमाई की है, जिसमें पटना सबसे आगे रहा।

BIHAR NEWS: बिहार में VIP नंबरों की होड़! दो महीने में 5.95 करोड़ की कमाई, पटना सबसे आगे

14-Feb-2026 07:36 PM

By First Bihar

BIHAR NEWS: बिहार में इन दिनों गाड़ियों के वीआईपी और आकर्षक नंबरों को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। वाहन मालिक अपनी गाड़ियों के लिए पसंदीदा और अलग पहचान देने वाले नंबर पाने के लिए लाखों रुपये तक खर्च कर रहे हैं। इस बढ़ती रुचि से राज्य सरकार को भी बड़ा राजस्व मिल रहा है। पिछले दो महीनों में परिवहन विभाग ने ई-नीलामी के माध्यम से करीब 5.95 करोड़ रुपये की कमाई की है। राज्य के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि इतने कम समय में यह उल्लेखनीय आय पहली बार दर्ज की गई है।


आंकड़ों के अनुसार 1 दिसंबर 2025 से 13 फरवरी 2026 के बीच कुल 4,117 वाहन मालिकों ने आकर्षक नंबरों की ऑनलाइन नीलामी में हिस्सा लिया। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इच्छुक लोग पहले पंजीकरण करते हैं और निर्धारित समय पर वेबसाइट के जरिए बोली लगाते हैं। सबसे अधिक बोली लगाने वाले को मनचाहा नंबर मिल जाता है।


इस दौड़ में राजधानी पटना सबसे आगे रही है। यहां के वाहन मालिकों ने आकर्षक नंबरों के लिए लगभग 2.46 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा मुजफ्फरपुर से 52.17 लाख रुपये, गया से 41 लाख रुपये और पूर्णिया से 33.53 लाख रुपये की आय हुई। वहीं खगड़िया और शिवहर जैसे जिलों में अपेक्षाकृत कम रुचि देखने को मिली।


सबसे अधिक मांग 0001, 0003, 0005, 0007 और 0009 जैसे विशेष नंबरों की रही। इन्हें उच्च श्रेणी में रखा गया है। गैर-परिवहन वाहनों के लिए इनकी आरक्षित कीमत 1 लाख रुपये और परिवहन वाहनों के लिए 35 हजार रुपये निर्धारित है। इसके बावजूद लोग अपनी पसंद का नंबर पाने के लिए अधिक राशि तक देने को तैयार हैं।


अब आकर्षक नंबर केवल पहचान का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बनते जा रहे हैं। इससे जहां वाहन मालिकों को अलग पहचान मिल रही है, वहीं राज्य सरकार के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। आने वाले समय में इस प्रवृत्ति के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।