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21-Jan-2026 11:52 AM
By Viveka Nand
Bihar News: वर्ष 2025 में बिहार के आठ विधायक-विधान पार्षदों द्वारा पेंशन और वेतन एक साथ लेने का मुद्दा उठा था. जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी. सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी सामने आई थी कि कई माननीय पेंशन और वेतन एक साथ ले रहे हैं. खबर सामने आने के बाद कई माननीयों की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई थी. हालांकि कई विधायकों ने इस पर कड़ा एतराज भी जताया था. विवाद बढ़ने के बाद कोषागार पदाधिकारी ने पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट किया था. आरटीआई के माध्यम से एक और जानकारी सामने आई है. अधिक पेंशन लेने वाले तीन माननीयों ने सरकारी खजाने में चालान के माध्यम से पैसा वापस किया है.
विवाद बढ़ने के बाद वापस करनी पड़ी पेंशन की राशि
बिहार के जाने-माने आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश राय ने एक और बड़ा खुलासा किया है. सूचना के अधिकार के तहत उन्हें जानकारी दी गई है कि तीन माननीय जो पेंशन के रूप में ज्यादा पैसा लिए थे, उन्होंने उक्त राशि को सरकारी खजाने में जमा कराया है. अधिक पेंशन उठाने का जब भंड़ाफोड़ हुआ तो अब जाकर तीन माननीय ने चालान के माध्यम से पैसा को ट्रेजरी में जमा किया है. सबसे अधिक उपेंद्र कुशवाहा ने राशि वापस किया है.
कुशवाहा ने 3.36 लाख की राशि वापस की
उपेंद्र कुशवाहा ने पेंशन की अधिक राशि लेने के बाद उसे सरकारी खजाने में वापस किया है. कुशवाहा ने 11 दिसंबर 2025 को 3 लाख 36 हजार 135 रुपए जमा किए हैं. यह रुपया इन्होंने पेंशन के रूप में अधिक लिया था. दूसरे नंबर पर रामसेवक सिंह हैं. ये वर्तमान में जदयू के विधायक हैं . इन्होंने पेंशन के रूप में 53867 रुपए अधिक लिया था, जिसे इन्होंने 10 दिसंबर 2025 को वापस किया है. तीसरे नंबर पर राहुल कुमार हैं जो राजद के विधायक हैं. इन्होंने पेंशन के रूप में 30400 ज्यादा ले लिया था. इन्होंने 15 दिसंबर 2025 को चालान के माध्यम से पटना कोषागार में वापस किया है.
आरटीआई एक्टिविस्ट ने वापस कराई राशि
बिहार के आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश राय कहते हैं कि विधायक-सांसद प्रतिमाह लाखों रूपये वेतन -अन्य सुविधाएं लेते हैं. इस पर नजर रखने के लिए नियुक्त आई. ए. ऐड. पर भी महीना में लाखों खर्च है. इसके बाद भी लाखों रुपया गलत ढंग से पेंशन के रूप में लिया जा रहा है. जिसे वे अपने प्रयास से वापस करा रहे हैं. उन्होंने बताया है कि कोषागार पदाधिकारी ने आज 21 जनवरी को तीन माननीयों द्वारा पेंशन के रूप में ली गई अधिक राशि की वापसी के बारे में पत्र लिखकर जानकारी दी है.

कोषागार पदाधिकारी की अधूरी जानकारी से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई
बता दें, पटना सचिवालय कोषागार के वरीय कोषागार पदाधिकारी ने 11 दिसंबर 2025 को वित्त विभाग के संयुक्त आयुक्त को पत्र लिखा था. जिसमें सूचना के अधिकार के तहत विधायक, विधान पार्षदों के पेंशन भुगतान की प्रारंभ की तिथि तथा उनके पेंशन जारी रहने के संबंध में जानकारी दी गई थी. इस पत्र के आलोक में वरीय कोषागार पदाधिकारी ने बताया था कि आरटीआई कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी. सूचना प्रदान करने क्रम में यह पत्र निर्गत किया गया है . आवेदक ने 8 विधायकों के पेंशन प्रारंभ की तिथि के बारे में सूचना मांगी थी, जिसे इस कार्यालय के द्वारा उपलब्ध कराया गया था. हालांकि यह खबर मीडिया में आई तो इसका अर्थ निकाला जा रहा है कि संबंधित माननीयों की पेंशन अभी भी जारी है. इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है कि वह पेंशन तथा वेतन दोनों प्राप्त कर रहे हैं.
कोषागार पदाधिकारी ने अब जाकर की स्थिति स्पष्ट
सचिवालय कोषागार के वरीय कोषागार पदाधिकारी ने स्पष्ट किया था है कि, वस्तु स्थिति यह है कि आठ विधायकों में से मात्र एक माननीय 'भोला यादव' का पेंशन भुगतान जारी है. शेष सभी सात विधायकों का पेंशन पूर्व में ही बंद कर दिया गया है . भोला यादव को 65000 रू पेंशन मिल रहा है. इनके पेंशन प्रारंभ होने की तिथि 14 नवंबर 2020 है जो नवंबर 2025 तक जारी है उपेन्द्र कुशवाहा को मार्च 2005 से अक्टूबर 2021 तक पेंशन मिला
वहीं उपेंद्र प्रसाद सिंह (उपेंद्र कुशवाहा) को 47000 रू पेंशन मिल रहा था. इनका पेंशन मार्च 2005 को शुरू हुआ और अक्टूबर 2021 तक मिला . दिनेश चंद्र ठाकुर के पेंशन की राशि 86000 रू प्रतिमाह है, यह पेंशन 7 मई 2020 से 16 नवंबर 2020 तक दी गई. ललन कुमार सर्राफ को ₹50000 पेंशन, 24 मई 2020 से 16 मार्च 2021 तक मिला. संजय सिंह को 68000 रू प्रतिमाह पेंशन 7 मई 2018 से अगस्त 2019 तक दिया गया .
नीतीश मिश्रा ने सिर्फ दो महीने तक ही पेंशन लिया
सतीश चंद्र दुबे को 59000 मासिक पेंशन 26 मई 2019 से 8 अक्टूबर 2019 तक दिया गया. नीतीश मिश्रा को 43000 रू मासिक पेंशन 22 सितंबर 2015 से 8 नवंबर 2015 तक दिया गया है. वहीं विजेंद्र प्रसाद यादव को ₹10000 मासिक पेंशन 24 मई 2005 से 21 नवंबर 2005 तक दिया गया.