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04-Sep-2025 01:35 PM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई देने वाला आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे अब धरातल पर उतरने को तैयार है। यह 189 किलोमीटर लंबा 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे भारतमाला परियोजना का हिस्सा है जो नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा बनाया जा रहा है। औरंगाबाद जिले के आमस गांव से शुरू होकर दरभंगा के बेला नवादा गांव तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ेगा।
वर्तमान में पटना से दरभंगा की यात्रा 8-10 घंटे लेती है लेकिन यह बनने के बाद सिर्फ 4 घंटे में पूरी हो जाएगी। 2025 के अंत तक इसके पूरा होने की उम्मीद है और इसका कुल खर्च करीब 5,000 करोड़ रुपये आंका गया है। इससे न सिर्फ ट्रैफिक जाम कम होगा बल्कि दरभंगा एयरपोर्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी जो पर्यटन और व्यापार को काफी ज्यादा बूस्ट देगा।
यह एक्सप्रेसवे 7 जिलों औरंगाबाद, गया, पटना, नालंदा, अरवल, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा के 19 शहरों को जोड़ेगा। आमस से शुरू होकर यह लहेरियासराय-बहेड़ी सड़क, NH-57 और NH-27 से जुड़ेगा। रूट में पटना आउटर रिंग रोड और कच्ची दरगाह-बिदुपुर ब्रिज के हिस्से भी शामिल हैं। इससे NH-2, NH-19, NH-57 और NH-27 के बीच सीधी कनेक्टिविटी बनेगी जो आर्थिक कॉरिडोर का काम करेगा।
आने वाले समय में इसकी वजह से किसानों को फसलें बाजार तक जल्द पहुंचाने में मदद मिलेगी जबकि उद्योगों और पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। भविष्य में इसे नेपाल बॉर्डर पर जयनगर तक बढ़ाने की योजना है। हालांकि, पर्यावरण क्लीयरेंस लंबित है लेकिन लैंड एक्विजिशन 2020 से चल रही है और कई गांवों में किसानों से सहयोग लिया जा रहा है।
इस एक्सप्रेसवे का डिजाइन पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड होगा यानी एंट्री-एग्जिट सिर्फ इंटरचेंज से होगी और कोई क्रॉसिंग नहीं। इससे दुर्घटनाएं 50% तक कम हो सकती हैं और डिजाइन स्पीड 100 किमी/घंटा रखी गई है। सेफ्टी फीचर्स में मीडियन, ग्रेड सेपरेटर और वेजसाइड एमेनिटीज शामिल होंगे और इसका निर्माण 4 पैकेज में होगा। पहला पैकेज आमस-शिवरामपुर (55 किमी), दूसरा शिवरामपुर-रामनगर (54.3 किमी), तीसरा रामनगर-पल दशरा (45 किमी) और चौथा पल दशरा-नवादा (44.1 किमी)।
MEIL (मेधा कंस्ट्रक्शन) इसके तीन पैकेज लेगा जबकि रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन एक का। हाल ही में जनवरी में पटना के रामनगर-कच्ची दरगाह सेक्शन के लिए भी 1,082 करोड़ की मंजूरी मिली है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है और 24 महीने का इसकी समय सीमा है। एक बात तय है कि इस एक्सप्रेसवे से बिहार की अर्थव्यवस्था में क्रांति आएगी और रोजगार के भी हजारों अवसर पैदा होंगे।
वहीँ इससे व्यापार भी बढ़ेगा क्योंकि NH-19 से NH-27 तक एक सीधा लिंक बनेगा। साथ ही पर्यटन को भी फायदा मिलेगा। गया, राजगीर, बिहारशरीफ जैसे स्थल आसानी से पहुंच योग्य होंगे। किसानों को लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम होगी और उद्योगों को रॉ मटेरियल सप्लाई भी तेजी से किया जा सकेगा। कुल मिलाकर, यह बिहार का पहला समर्पित एक्सप्रेसवे होगा जो राज्य को राष्ट्रीय हाईवे नेटवर्क से मजबूती देगा।