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Bihar Land Purchase: जमीन खरीदने में नहीं चाहिए कोई विवाद तो हमेशा करें यह 3 काम, बाद में नहीं आएगी रोने की नौबत

Bihar Land Purchase: बिहार में जमीन खरीदने से पहले ये तीन काम जरुरी, वरना पड़ सकता है पछताना। अब तक सैकड़ों लोग कर चुके हैं ये गलतियां.. जिसका भुगतना पड़ा उनको खामियाजा।

03-Jun-2025 09:03 AM

By First Bihar

Bihar Land Purchase: बिहार में जमीन खरीदना किसी के लिए भी जीवन का सबसे बड़ा निवेश हो सकता है, लेकिन यहाँ जमीन से जुड़े विवादों की लंबी फेहरिस्त है। चाहे वह साझेदारी की जमीन हो या गलत दस्तावेजों का मामला, बिना सावधानी के खरीदारी भविष्य में कानूनी झंझट का कारण बन सकती है। बिहार सरकार ने डिजिटल पहल के तहत biharbhumi.bihar.gov.in पोर्टल शुरू किया है, जो जमीन के रिकॉर्ड को ऑनलाइन जांचने की सुविधा देता है।


इस पोर्टल पर खाता, खेसरा नंबर, रकबा और मालिकाना हक की जानकारी आसानी से उपलब्ध है। अगर आप बिहार में जमीन खरीदने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले इस वेबसाइट पर जमाबंदी की जांच करें। यह सुनिश्चित करता है कि जमीन बेचने वाले का हक वैध है और रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी नहीं है। बिहार के कई जिलों में जमीन विवादों की खबरें आम हैं, इसलिए यह कदम आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है।


दूसरी महत्वपूर्ण सावधानी है साझेदारी वाली जमीन के मामले में सभी हिस्सेदारों से लिखित सहमति लेना। बिहार में कई बार लोग साझेदारी की जमीन खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि सभी हिस्सेदारों की मंजूरी नहीं थी। इससे दाखिल-खारिज की प्रक्रिया रुक जाती है, और खरीदार को कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते हैं। biharbhumi.bihar.gov.in पर आप जमीन के हिस्सेदारों की जानकारी चेक कर सकते हैं।


अगर जमीन साझा है, तो सुनिश्चित करें कि सभी हिस्सेदारों ने बिक्री के लिए लिखित में सहमति दी है। यह सहमति नोटरीकृत होनी चाहिए, ताकि कानूनी रूप से कोई दिक्कत न हो। बिहार के जहानाबाद और पटना जैसे जिलों में ऐसे विवादों के कई मामले सामने आए हैं, जहाँ हिस्सेदारों की अनदेखी ने खरीदारों को परेशान किया।


तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कदम है दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को समझना। यह मालिकाना हक का कानूनी आधार है, जो जमीन खरीदने के बाद आपके नाम पर रिकॉर्ड दर्ज करता है। इसके लिए बेचने वाले का मालिकाना हक साफ होना चाहिए, जो ऑनलाइन रिकॉर्ड से सत्यापित हो सकता है। बिहार में दाखिल-खारिज के लिए अंचल कार्यालय में आवेदन करना पड़ता है, और इसके लिए सही खेसरा नंबर, रकबा और बिक्री पत्र (सेल डीड) जरूरी हैं।


कई बार लोग बिना ऑनलाइन जांच के जल्दबाजी में जमीन खरीद लेते हैं, और बाद में पता चलता है कि जमीन पर कर्ज, विवाद या गलत रिकॉर्ड है। बिहार सरकार और जिला प्रशासन बार-बार अपील करते हैं कि खरीद से पहले दो मिनट की ऑनलाइन जांच कर लें, ताकि भविष्य में पछतावा न हो।