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BETTIAH: पैसे के अभाव में बीमार कर्मचारी की मौत, 10 महीने से नहीं मिला वेतन, रामलखन सिंह यादव कॉलेज के प्रिसिंपल पर तानाशाही का आरोप

बेतिया के रामलखन सिंह यादव कॉलेज में 10 महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण माली धर्मेंद्र यादव की इलाज के अभाव में मौत हो गई। दो महीने पहले ही शादी हुई थी। मृतक की पत्नी को स्थायी नौकरी और मुआवजा दिये जाने की मांग लोग कर रहे हैं।

08-Aug-2025 03:58 PM

By First Bihar

WEST CHAMPARAN: पश्चिम चंपारण के बेतिया स्थित रामलखन सिंह यादव कॉलेज के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को 8 महीने से वेतन तक नसीब नहीं हुआ है। अपनी इस वाजिब मांग को लेकर दैनिक कर्मी 18 जून 2025 से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन इनकी सुध तक लेना प्रिसिंपल ने मुनासिब नहीं समझा। वेतन नहीं मिलने के चलते इलाज के आभाव में कॉलेज में माली के पद पर कार्यरत धर्मेन्द्र कुमार उर्फ भोला की मौत हो गयी। इस घटना से परिजनों के बीच कोहराम मचा हुआ है। परिजनों के आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मृतक की शादी दो महीने पहले ही हुई थी। 


उसकी पत्नी का कहना है कि तबीयत खराब था सरकारी में दिखाये प्राइवेट में भी गये पैसा खत्म हो गया था डॉक्टर ने निकाल दिया और रास्ते में पति की मौत हो गयी। 10 महीने से वेतन नहीं मिला है। पैसे के अभाव के चलते सही से इलाज नहीं हो पाया जिसके कारण मेरे पति ने आज दम तोड़ दिया। मृतक की पत्नी का रो-रोकर बुरा है। महाविद्यालय दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के लोगों की मांग है कि मृतक की पत्नी को स्थायी नौकरी और मुआवजा दिया जाए। घर में सिर्फ वही कमाता था, उसी के कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। अब परिवार का भरण पोषण कैसे होगा यह बड़ा सवाल सबके सामने है.  

 

महाविद्यालय दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के सदस्य धर्मेन्द्र कुमार उर्फ भोला कुमार की पैसे के अभाव के कारण इलाज समय से नहीं हो सका। जिसके कारण आज उनकी मौत हो गयी। बता दें कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ द्वारा विगत 18 जून से अपने वेतन की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। इसी धरना प्रदर्शन में धर्मेंद्र कुमार उर्फ भोला भी अपनी बकाया वेतन की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहा था। धरना प्रदर्शन के दौरान ही उसकी अचानक तबीयत खराब हो गई और उसे बेतिया जीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान गुरुवार की रात में उनकी मौत हो गयी।


 परिजनों का कहना है कि पैसे की किल्लत के चलते समुचित इलाज नहीं हो सका। जिस कारण उनकी मौत हो गई। पत्नी मुन्नी देवी का कहना है कि विगत 10 महीने से राम लखन सिंह कॉलेज से वेतन का भुगतान नहीं किया गया। जिस कारण इलाज में ही हम लोगों ने अपना चार कट्ठा खेत बेचकर लगा दिया और पैसे की दिक्कत से इनका समुचित इलाज हम लोग नहीं कर पाए।  जिस कारण गुरुवार को देहांत हो गया। कॉलेज के प्राचार्य अभय कुमार से हम लोगों ने यह विनती की थी कि आप कम से कम रहम खाकर पैसे का भुगतान कर दें। ताकि इनका समुचित इलाज करवा सके, लेकिन इन्होंने हम लोगों की एक न सुनी। यदि कॉलेज द्वारा वेतन की भुगतान समय पर कर दिया गया रहता तो आज धर्मेंद्र जिंदा रहते। 


 वही शव को आरएलएसवाइ कॉलेज के प्रशासनिक भवन के सामने रखकर आज भी पूरे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ धरना प्रदर्शन किया। संघ के सदस्य ऋषि कुमार ने बताया कि जब धरना पर धर्मेंद्र बैठा था। तभी इसकी तबीयत खराब हो गई। हम लोग कॉलेज के प्राचार्य अभय कुमार के पास मिलने गए और बोले कि हम लोग का वेतन का भुगतान न करें परंतु भोला का तबीयत खराब है। इसका वेतन का भुगतान कर दे। ताकि इसकी समुचित इलाज हो सके लेकिन प्राचार्य ने हम लोग की एक न सुनी और इनका भुगतान नहीं किया जिससे आज भोला हमलोगों के बीच नहीं रहा।


धरना पर बैठे दैनिक कर्मियों का कहना है कि यहां के प्रिंसिपल साहब को सिर्फ कमीशन से मतलब है और किसी चीज से इन्हें मतलब नहीं है। इनका कहना है कि तुम लोग को 10 महीने का सैलरी चाहिए तो 50% हमको देना होगा। हम सब का वेतन 14 हजार रूपया है। इतना कम पैसा में पूरे परिवार का भरण पोषण करते हैं। इनका कहना है कि 14000 में 50% हमको दो तभी पेमेंट होगा। कंपनी के माध्यम से स्टाफ नया बहाल करके ला रहे हैं, जबकि यहां जो पहले से स्टाफ है उसको वेतन तक नहीं दे रहे हैं। धर्मेंद्र कुमार यादव को हम लोग भोले के नाम से पुकारते थे। उनके लिए हम लोगों ने प्रिंसिपल से मांग किया था कि हम लोग का वेतन छोड़िए कम से कम धर्मेंद्र को वेतन दिया जाए क्योंकि इसकी तबीयत बहुत खराब है लेकिन तानाशाह प्रिंसिपल ने वेतन नहीं दिया जिसके कारण इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई। 


18 जून 2025 से धरना पर हम लोग बैठे हैं। लेकिन हमारा भुगतान दिसंबर 2024 से लंबित है। हमारे ही बीच के स्टाफ भोला जी जिनका नाम धर्मेंद्र यादव था वो माली के पद पर कार्यरत थे।आज पैसे के अभाव में इनका समुचित इलाज नहीं हो पाया जिसके चलते उनकी मौत हो गई। पिछले एक महीने से वो वेंटिलेटर पर थे। प्रिंसिपल से मिलकर हमने उनके इलाज की व्यवस्था करने की अपील की लेकिन उन्होंने एक ना सुनी। उनके हिटलरशाही रवैय्ये के चलते धर्मेंद्र यादव ने दम तोड़ दिया। यदि प्रिसिंपल चाहते तो उसकी जान बचा सकते थे लेकिन उनके इस रवैय्ये ने उसकी जान ले ली। उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोग काफी सदमे में हैं। 


अकेला धर्मेन्द्र ही इस परिवार का भरण पोषण करने वाला था। उसकी शादी दो माह पहले ही हुई थी। पत्नी को देखने सुनने वाला अब कोई नहीं है। दैनिक कर्मियों ने प्रशासन से हम यही मांग की है कि मृतक की पत्नी को स्थायी नौकरी और मुआवजा दिया जाए ताकि उसकी और मां की जिन्दगी सही से कट सके। संघ के सेक्रेटरी जयप्रकाश कुमार ने कहा कि इस संबंध में जिलाधिकारी से भी हम लोग मिले थे। उनका कहना था कि कॉलेज प्रशासन ही कुछ कर सकते हैं। हम लोग कुछ नहीं कर सकते। हम लोग का काम लॉ एंड ऑर्डर बहाल करना है। इतने दिनों से हम लोग धरना प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन यहां के प्रिसिंपल ने आज तक किसी की सुध नहीं ली। इसी का नतीजा है कि आज हमारे बीच धर्मेन्द्र यादव नहीं रहे। 

बेतिया से संतोष की रिपोर्ट