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24-Feb-2026 11:39 AM
By First Bihar
EWS reservation policy : बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत अंकों की छूट देने के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि क्वालीफाइंग मार्क्स में ईडब्ल्यूएस को 5% की अलग से छूट देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जबकि कुछ अभ्यर्थियों और का तर्क है कि यह समानता के अधिकार के अनुरूप होना चाहिए।
विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा के विधायक मिथलेश तिवारी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 स्पष्ट करता है कि राज्य भारत के भूभाग में किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता और समान संरक्षण से वंचित नहीं रख सकता। उनका कहना है कि जब अन्य आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट मिलती है, तो ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को भी क्वालीफाइंग मार्क्स में 5% की राहत मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें वास्तविक अवसर मिल सके। उनका सवाल था कि क्या सरकार STET की परीक्षा में EWS को आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को 5% रिलैक्सेशन देगी? इस संबंध में हाईकोर्ट का भी आदेश है।
इस मामले में 16 सितंबर 2025 को Patna High Court ने भी एक महत्वपूर्ण आदेश दिया था। जानकारी के अनुसार, इस समस्या से परेशान एक छात्र ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि आवेदक अपना आवेदन मुख्य सचिव या अतिरिक्त मुख्य सचिव को दे और सरकार इस पर उचित निर्णय ले। कोर्ट ने सरकार को मामले पर विचार कर स्पष्ट निर्णय लेने का संकेत दिया।
भाजपा के विधायक मिथलेश तिवारी का कहना है कि 103वें संविधान संशोधन के तहत ईडब्ल्यूएस वर्ग को 10% आरक्षण का प्रावधान दिया गया है। उनका तर्क है कि किसी अन्य वर्ग के आरक्षण को प्रभावित किए बिना ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को 5% अंकों की छूट दी जा सकती है। उनका यह भी कहना है कि जब न्यायालय ने सरकार को निर्णय लेने का निर्देश दिया है, तो सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
इस पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षक भर्ती परीक्षा में ईडब्ल्यूएस के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान लागू कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस 5% छूट की बात की जा रही है, वह एक विशेष परीक्षा से संबंधित मांग है। इस पर मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि ईडब्लूएस को 10फीसदी आरक्षण का प्रावधान है, जो TRE में लागू है। इसके आगे मंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का सरकार अवलोकन करेगी और यह देखा जाएगा कि उसमें कोई स्पष्ट निर्देश है या केवल विचार करने की बात कही गई है।
मंत्री ने आगे कहा कि संविधान के प्रावधानों का भी विधिवत अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्य सचिव स्तर पर इस मामले का आकलन कर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। सरकार यह भी देखेगी कि अगर नियमों में संशोधन की जरूरत है तो क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
हालांकि, अभ्यर्थियों के बीच इस मुद्दे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि जब अन्य वर्गों को नियमानुसार छूट मिलती है, तो ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों को भी समान अवसर मिलना चाहिए। अब सबकी नजर राज्य सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी है कि वह हाईकोर्ट के निर्देश और संवैधानिक प्रावधानों के आलोक में क्या कदम उठाती है।
विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान कई अन्य सदस्यों ने भी डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर कंप्यूटर शिक्षकों की बहाली होती है, तो सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी निजी स्कूलों के बराबर तकनीकी शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।
फिलहाल राज्य के युवाओं और अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। सामान्य शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होते ही कंप्यूटर शिक्षक बहाली को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है।