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Darbhanga Queen : दरभंगा की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन, मिथिला में शोक की लहर

बिहार के दरभंगा से एक दुखद खबर सामने आई है। दरभंगा राज परिवार की वरिष्ठ सदस्य और महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी, महारानी कामसुंदरी देवी का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं और सोमवार को अपने राज परिसर स्थित

Darbhanga Queen : दरभंगा की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन, मिथिला में शोक की लहर

12-Jan-2026 09:26 AM

By First Bihar

Darbhanga Queen : बिहार से एक दुखद खबर सामने आई है। दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को निधन हो गया। वे लगभग 96 वर्ष की थीं और पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं। महारानी ने अपने राज परिसर स्थित कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर ने न केवल दरभंगा बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है। लोग महारानी को एक आदरणीय और समाजसेवी महिला के रूप में याद कर रहे हैं।


महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा के प्रसिद्ध महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं। उनकी शादी 1940 के दशक में महाराजा कामेश्वर सिंह से हुई थी। महाराजा की पहली दो पत्नियां, महारानी राजलक्ष्मी और महारानी कामेश्वरी प्रिया, पहले ही इस दुनिया से विदा ले चुकी थीं। ऐसे में कामसुंदरी देवी परिवार की वरिष्ठ सदस्य के रूप में जानी जाती थीं और उनके निधन से राज परिवार में गहरी शोक की छाया है।


महारानी कामसुंदरी देवी ने अपने जीवन को समाज सेवा और परोपकारी कामों को समर्पित किया। वे केवल राज परिवार की प्रतिष्ठित सदस्य ही नहीं थीं, बल्कि समाज की जरूरतों को समझने और पूरा करने में भी हमेशा आगे रहती थीं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए। महारानी ने अपने पति महाराजा कामेश्वर सिंह की स्मृति में “महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन” की स्थापना की थी। यह फाउंडेशन आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है और मिथिला क्षेत्र के लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को संचालित करता है।


महारानी कामसुंदरी देवी का योगदान विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय रहा। फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने छात्रवृत्तियों, स्कूलों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की, जिससे गरीब और जरूरतमंद छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिले। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवा में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कराया, ताकि लोगों को मुफ्त या किफायती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।


महारानी कामसुंदरी देवी समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए भी निरंतर कार्य करती रहीं। उनके प्रयासों से कई अनाथालय, वृद्धाश्रम और सामाजिक संस्थान संचालित हो रहे हैं, जो आज भी लोगों के लिए मार्गदर्शन और सहायता का स्रोत हैं। उनकी सोच और समाजसेवी दृष्टि ने मिथिला क्षेत्र के लोगों के जीवन में स्थायी प्रभाव डाला है।


दरभंगा के लोग महारानी कामसुंदरी देवी को उनकी सादगी, उदारता और समाज सेवा के लिए याद करेंगे। उनके निधन से न केवल राज परिवार बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर है। राज परिवार के सदस्यों ने उनकी याद में श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।


राज परिसर और कल्याणी निवास में उनके अंतिम दर्शन के लिए लोग पहुंचे और उन्होंने महारानी के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त की। उनके निधन की खबर ने मिथिला के लोगों को एक बार फिर यह याद दिलाया कि समाज सेवा और परोपकार का मार्ग हमेशा मूल्यवान और प्रेरणादायक होता है।


महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन एक मिसाल था, जिसमें उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों और समाज सेवा को संतुलित रूप से निभाया। उनकी यादें, उनके योगदान और उनके द्वारा स्थापित फाउंडेशन के काम आज भी उनके जीवन की गवाही देते हैं। उनके निधन से एक युग का अंत हुआ है, लेकिन उनके कार्य और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा जीवित रहेगी।


महारानी कामसुंदरी देवी के निधन की खबर ने मिथिला क्षेत्र में गहरी संवेदना और शोक की भावना पैदा कर दी है। लोग उन्हें केवल एक महारानी के रूप में ही नहीं, बल्कि समाज की भलाई के लिए समर्पित एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में याद करेंगे।