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15-Jan-2026 09:42 PM
By First Bihar
SAHARSA: बिहार के सहरसा जिले के सिहौल गांव की प्रसिद्ध टिकरी मिठाई अब सिर्फ स्थानीय स्वाद तक सीमित नहीं रही। अपनी शुद्धता, पारंपरिक स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता के कारण सिहौल की टिकरी बिहार के विभिन्न जिलों, देश के कई राज्यों के साथ-साथ नेपाल और भूटान तक अपनी मिठास बिखेर चुकी है।
शुद्ध दूध, खोया और देशी घी से तैयार की जाने वाली यह टिकरी स्वाद में लाजवाब होती है। यही वजह है कि लोग इसे रिश्तेदारों और परिचितों के लिए संदेश (उपहार) के रूप में भी बड़े चाव से भेजते हैं। सिहौल चौक स्थित मां गहिल मिष्ठान भंडार जैसी दुकानों ने वर्षों से इसकी शुद्धता और पारंपरिक स्वाद को बनाए रखा है, जिससे इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
सिहौल की टिकरी पूरी तरह शुद्ध दूध, खोया और देशी घी से बनाई जाती है। इसमें किसी भी प्रकार की मिलावट नहीं की जाती, जिससे इसका स्वाद और गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है। शुद्ध वजन और ताजगी इसकी पहचान है। सहरसा–सुपौल मुख्य मार्ग से गुजरने वाले यात्री अक्सर सिहौल चौक पर रुककर इस प्रसिद्ध टिकरी का स्वाद लेना और इसे खरीदना नहीं भूलते।
दुकानदार बच्चन कामत बताते हैं कि वे वर्ष 1993 से सिहौल चौक पर कुल देवी मां गहिल के नाम से मिठाई की दुकान चला रहे हैं। उनका कहना है कि वे केवल शुद्ध दूध, खोया और देशी घी से ही मिठाई तैयार करते हैं। इसी कारण प्रतिदिन लगभग तीन क्विंटल टिकरी बनती है। दूर-दराज से लोग उनकी दुकान पर टिकरी खरीदने पहुंचते हैं। सुपौल जिला मुख्यालय के हुसैन चौक निवासी नौशाद बताते हैं कि वे अपने दादा की पीढ़ी से सिहौल की टिकरी खाते आ रहे हैं।
वहीं, सहरसा में रिश्तेदारी में आए टाटा-जमशेदपुर निवासी हरे राम कामत और नेपाल के इकहरी से आए प्रमोद पौदार का कहना है कि वे यहां से टिकरी मिठाई संदेश के रूप में खरीदकर अपने घर ले जाते हैं। उनका कहना है कि सिहौल की टिकरी का स्वाद ऐसा है, जिसे एक बार चखने के बाद कोई भूल नहीं पाता। यही वजह है कि दूर-दराज के इलाकों और पड़ोसी देशों से भी लोग यहां मिठाई खरीदने आते हैं।