मुजफ्फरपुर में हजरत दाता कंबल शाह का 144वां उर्स: पुलिस की चादर जुलूस, अमन-चैन की मांगी दुआ आरा में बाइक मैकेनिक की गोली मारकर हत्या, इलाके में सनसनी जन सुराज को फिर से खड़ा करने में जुटे प्रशांत किशोर, 15 नए प्रदेश महासचिव की लिस्ट जारी छपरा पहुंचे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, बोले..जन समस्याओं का होगा त्वरित समाधान बिहार में 6 अप्रैल से स्कूल का नया टाइमटेबल: 7 बजे से पहले बजेगी घंटी चंडीगढ़ में भाजपा कार्यालय के बाहर ब्लास्ट से हड़कंप, जांच में जुटीं पुलिस करप्शन किंग SDPO को हटाया गया: PHQ ने वापस बुलाया, EOU की रेड में करीब 80 करोड़ की संपत्ति का खुलासा टेंट हाउस के मालिक पर नाबालिग के साथ अश्लील हरकत करने का आरोप, आक्रोशित लोगों ने घर के बाहर किया हंगामा पटना में अगलगी की दो घटना: एंबुलेंस में लगी आग, AC फटने से नर्सिंग होम में मची अफरा-तफरी बिहार के इस जिले में नई चीनी मिल...100 एकड़ भूमि चिन्हित, गन्ना उद्योग विभाग के ACS ने जमीन का किया निरीक्षण
04-Oct-2025 07:36 AM
By Dhiraj Kumar Singh
Bihar News: बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही मुख्यमंत्री लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को जमुई के बटिया में प्रस्तावित मुख्यमंत्री का जनसंवाद कार्यक्रम और बहुप्रतीक्षित बरनार जलाशय परियोजना का शिलान्यास होना था। लेकिन अंतिम समय पर यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। जिलाधिकारी नवीन ने पुष्टि की कि खराब मौसम की वजह से मुख्यमंत्री का दौरा संभव नहीं हो पाया।
दरअसल, बरनार जलाशय परियोजना को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से उत्सुकता रही है। माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री के हाथों शिलान्यास से किसानों और ग्रामीणों की दशकों पुरानी समस्या का समाधान निकल सकेगा। यह परियोजना न केवल सिंचाई बल्कि पेयजल संकट को भी दूर करने में अहम साबित हो सकती है।
वहीं, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए प्रशासन और स्थानीय नेताओं की ओर से बड़ी तैयारियां की गई थीं। हजारों लोगों के जुटने की संभावना थी और ग्रामीण बड़ी उम्मीदों के साथ कार्यक्रम का इंतजार कर रहे थे। लेकिन अचानक कार्यक्रम रद्द होने से भीड़ निराश हो गई।
अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के इस दौरे की नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी। ग्रामीण अब नई तारीख की घोषणा पर निगाहें लगाए हुए हैं। बरनार जलाशय परियोजना लगभग 50 साल से लंबित है। यह मुद्दा हर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उठता रहा है। नेताओं ने हर बार इसके शीघ्र पूरा होने का वादा किया, लेकिन अब तक यह साकार नहीं हो सका।
परियोजना अधूरी रहने का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। आसपास के खेतों में सिंचाई की सुविधा न होने से हजारों एकड़ भूमि पर फसलें सूख जाती हैं। किसान मजबूरी में महंगे डीजल पंप और ट्यूबवेल का सहारा लेते हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है और मुनाफा घट जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बरनार जलाशय परियोजना पूरी हो जाती है तो क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ेगा, पेयजल संकट दूर होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। यही वजह है कि ग्रामीण इसे अपने इलाके की जीवनरेखा परियोजना मानते हैं।