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Bihar Census 2027 : बिहार में इस बार होगा डिजिटल जनगणना, 33 सवालों से बनेगा नया डेटा बेस; जानिए क्या -क्या पूछा जाएगा

बिहार में भारत की जनगणना 2027 के लिए तैयारियां तेज। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया – मोबाइल ऐप और CMMS से होगी पूरी डिजिटल स्व-गणना, घर बैठे नागरिक दर्ज कर सकेंगे अपनी जानकारी।

24-Feb-2026 02:46 PM

By First Bihar

Bihar Census 2027 : बिहार में प्रस्तावित भारत की जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने स्पष्ट किया कि यह देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। इस बार नागरिक अपने मोबाइल फोन या सरकारी पोर्टल के माध्यम से सीधे अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे डेटा संग्रह तेज, पारदर्शी और अधिक विश्वसनीय बनेगा।


मुख्य सचिव ने कहा कि आने वाली जनगणना के दौरान कागजों का झंझट पूरी तरह खत्म हो जाएगा। अब सारी प्रक्रिया ‘सेंसस मॉनीटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (CMMS) और मोबाइल ऐप के जरिए संचालित होगी। उन्होंने यह भी जोर दिया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए डेटा की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है।


स्व-गणना: घर बैठे जानकारी दर्ज करने का विकल्प

जनगणना 2027 में सरकार ने जनता को ‘स्व-गणना’ (Self Counting) का विकल्प दिया है। इसका मतलब है कि नागरिक अपने घर से ही सुरक्षित तरीके से मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर अपनी जानकारी अपलोड कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए डेटा न केवल जल्दी संकलित होगा, बल्कि त्रुटियों की संभावना भी कम होगी।


स्टेट कोऑर्डिनेटर सीके अनिल ने बताया कि नागरिकों को अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर 17 अप्रैल से 1 मई 2027 तक मिलेगा। इस दौरान परिवार के अलग-अलग मकानों की जानकारी भी अलग-अलग दर्ज की जा सकती है। इसके बाद 2 मई से 31 मई तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे, जिससे सभी डेटा की पुष्टि होगी।


33 सवालों से तैयार होगी परिवार की तस्वीर

जनगणना के दौरान नागरिकों से कुल 33 प्रकार के सवाल पूछे जाएंगे। इनमें मकान की स्थिति, परिवार के सदस्यों की जानकारी, बुनियादी सुविधाएं, घरेलू उपकरणों की उपलब्धता और जीवन स्तर से जुड़े पहलू शामिल होंगे। सीके अनिल ने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की सरकारी योजनाएं और विकास नीति तैयार की जाती हैं। इसलिए जानकारी का सही होना बेहद आवश्यक है।


2027 में दूसरा चरण

जनगणना का दूसरा चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। इस दौरान जनगणना कर्मी घर-घर जाकर परिवार में शामिल लोगों की सूची तैयार करेंगे और अंतिम आबादी का आंकड़ा इकठ्ठा करेंगे। इस अभियान की निगरानी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल और जनगणना निदेशालय के निदेशक एम. रामचंद्रुडू करेंगे। उनका कहना है कि हाई-टेक ऐप के इस्तेमाल से डेटा संकलन न केवल तेज होगा बल्कि पूरी तरह विश्वसनीय भी होगा।


डिजिटल जनगणना से प्रशासनिक सुधार

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र और राज्य की नीतियों की नींव है। सही और पारदर्शी डेटा मिलने से नीतियों की दिशा और योजनाओं की सटीकता सुनिश्चित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बिहार में प्रशासनिक डेटा प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। डिजिटल जनगणना लागू होने से समय की बचत होगी, त्रुटियों की संभावना कम होगी और सरकार को योजनाओं को सही ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।


मुख्य सचिव ने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता, टीम भावना और सटीकता के साथ पूरी करनी होगी। बिहार में पहली बार डिजिटल जनगणना लागू होने से न केवल प्रदेश का प्रशासनिक कामकाज और डेटा प्रणाली मजबूत होगी, बल्कि नागरिकों को भी इसमें सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलेगा।


2027 की जनगणना बिहार में प्रशासनिक और डिजिटल परिवर्तन की एक नई मिसाल होगी। स्व-गणना और मोबाइल ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया, फिजिकल वेरिफिकेशन और आधुनिक डेटा संकलन प्रणाली राज्य को विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगी। सही आंकड़े न केवल योजनाओं की सफलता की कुंजी होंगे बल्कि नीति निर्माण और विकास की नींव भी मजबूत करेंगे।