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31-Aug-2025 08:58 AM
By First Bihar
Bihar Flood: गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है और शनिवार शाम तक यह खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार, शनिवार शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर 33.62 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो खतरे के निशान 33.68 मीटर से महज छह सेंटीमीटर नीचे था। बीते 24 घंटे में गंगा 15 सेंटीमीटर बढ़ी है, जबकि 25 अगस्त से 30 अगस्त के बीच जलस्तर में करीब एक मीटर की वृद्धि दर्ज की गई।
विभाग के अनुसार, प्रयागराज, वाराणसी, बक्सर और पटना जैसे शहरों में दोपहर दो बजे तक गंगा का जलस्तर घट रहा था, जिससे उम्मीद है कि अगले दो दिनों में भागलपुर में भी जलस्तर स्थिर हो जाएगा और फिर धीरे-धीरे गिरावट शुरू होगी। हालांकि, जिले के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 34.50 मीटर के खतरे के निशान से 92 सेंटीमीटर ऊपर 35.42 मीटर दर्ज किया गया, वहीं कहलगांव में यह 31.09 मीटर के खतरे के निशान से 91 सेंटीमीटर ऊपर 32 मीटर पर पहुंच गया।
गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी से भागलपुर शहर के बूढ़ानाथ, दीपनगर, मानिक सरकार घाट, किलाघाट, टीएमबीयू प्रशासनिक भवन के पीछे तथा अन्य निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। कई स्थानों पर घरों की चहारदीवारियों तक पानी आ गया है, जिससे लोगों को मुख्य सड़कों तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है।
सबौर प्रखंड में फिलहाल गंगा का कटाव स्थिर है, लेकिन जलस्तर में लगातार वृद्धि के चलते दबाव बना हुआ है। कहलगांव के इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध के किनारे गंगा फिर से रौद्र रूप में दिखने लगी है। प्रशासन के अनुसार, बुद्धूचक से बिंदटोली के बीच कई स्थानों पर खतरा बढ़ सकता है, इसलिए 24 घंटे निगरानी के लिए विभागीय टीमें तैनात हैं।
कहलगांव के प्रशस्तिडीह, कोदवार, घोघा, जानीडीह, भोलसर, एकचारी, ओगरी आदि पंचायतों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। भोलसर स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय में चार से पांच फीट तक पानी भर चुका है, हालांकि शनिवार तक यहां पढ़ाई जारी रही।
भागलपुर जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश ने बताया कि गंगा का जलस्तर रविवार को भी बढ़ेगा और यह खतरे के निशान को पार कर सकता है। हालांकि अगले एक-दो दिनों में इसमें गिरावट की उम्मीद है। सभी तटबंधों पर निगरानी जारी है और विभाग की टीमें पूरी तरह से सतर्क हैं।
इस वर्ष यह तीसरी बार है जब गंगा का जलस्तर इस तरह से बढ़ा है। नाथनगर दियारा के शंकरपुर, रत्तीपुर बैरिया, श्रीरामपुर, गोसाईंदासपुर जैसे गांवों की सड़कों पर फिर से पानी भर गया है। पहले 20 से 25 अगस्त के बीच जलस्तर में कमी आने से लोगों को राहत मिली थी और बाढ़ शिविर छोड़कर घर लौटने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब पानी के फिर से बढ़ने से लोगों को कम से कम एक माह और राहत शिविरों में ही रहना पड़ सकता है।
इधर, कोसी नदी में भी उफान जारी है। शनिवार को दोपहर दो बजे नवगछिया सीमा पर स्थित कुरसेला में कोसी का जलस्तर 30.55 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 30 मीटर से 55 सेंटीमीटर अधिक था। इससे नवगछिया अनुमंडल में कोसी तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। शाहकुंड प्रखंड के निचले क्षेत्रों में भी बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। खासकर किसानों के लिए स्थिति और चिंताजनक है क्योंकि धान की अधिकतर फसलें पहले ही समाप्त हो चुकी हैं, और जो थोड़ी बहुत बची हैं, उनके डूबने का खतरा मंडरा रहा है।
प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा है। लगातार निगरानी और संभावित खतरे वाले इलाकों में आवश्यक संसाधन जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और बाढ़ के प्रति सतर्क रहें। विशेषकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।