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1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 28 Jun 2025 07:39:34 AM IST
बिहार न्यूज - फ़ोटो GOOGLE
Shravani Mela 2025: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत इस वर्ष 11 जुलाई 2025 से हो रही है, जिसे लेकर बिहार और झारखंड दोनों राज्यों में प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। शुक्रवार को मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने मेले की तैयारियों को लेकर राज्य के आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और विशेष रूप से भीड़ प्रबंधन, कांवड़ियों की सुरक्षा और सुविधाओं की उपलब्धता पर फोकस करने के निर्देश दिए।
सीएस मीणा ने अधिकारियों को बीते वर्ष जहानाबाद के बराबर पहाड़ी पर हुई भगदड़ की घटना से सीख लेने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सशक्त रणनीति तैयार करने को कहा है। बैठक में पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, सहित अन्य वरीय पदाधिकारी मौजूद रहे।
13 जिलों के डीएम, एसपी और अन्य विभागों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए और अपनी तैयारियों की जानकारी दी। पर्यटन विभाग ने श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं को सभी आवश्यक सुविधाएं देने की योजना तैयार की है। विशेष रूप से टेंट सिटी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें पेयजल और स्वच्छ शौचालय कांवड़ स्टैंड, बिजली की व्यवस्था, साफ-सफाई एवं कूड़ा प्रबंधन, दर्पण, प्राथमिक उपचार और मोबाइल चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध होंगी।
श्रावण मास के आरंभ के साथ ही देश-विदेश से श्रद्धालु सुल्तानगंज में एकत्र होंगे, जहाँ वे गंगाजल भरते हैं। इसके बाद वे नंगे पांव लगभग 105 किलोमीटर की यात्रा करते हुए देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथधाम पहुंचते हैं। यह पवित्र जल यात्रा श्रावण कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक चलती है। बाबा बैद्यनाथधाम में स्थित रावणेश्वर महादेव का ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, और बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा और नेपाल के श्रद्धालुओं के लिए यह निकटतम पवित्र स्थल है।
प्रशासन का कहना है कि इस बार मेले में ड्रोन सर्विलांस, सीसीटीवी कैमरे, फर्स्ट एड सेंटर, एम्बुलेंस, और हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्थाएं भी बेहतर की जा रही हैं। साथ ही सभी रास्तों पर माइकिंग, मार्ग निर्देशक साइनबोर्ड, और स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी ताकि कोई अव्यवस्था न हो। श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक समन्वय का उदाहरण है। प्रशासन की कोशिश है कि इस बार श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हो।